भारत आ रहे थाई कार्गो शिप पर हमला :होर्मुज स्ट्रेट में प्रोजेक्टाइल से लगी आग, विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता; जानें क्या कहा?

तेहरान। मिडिल ईस्ट के बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की ओर आ रहे एक कार्गो जहाज पर हमला होने की घटना सामने आई है। यह जहाज गुजरात के कांडला पोर्ट की ओर जा रहा था, तभी अचानक एक अनजान प्रोजेक्टाइल उससे टकरा गया। इस टक्कर के बाद जहाज में आग लग गई। जहाज पर कुल 23 क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें से 20 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि तीन क्रू मेंबर गायब बताए जा रहे हैं। इस हमले के बाद भारत ने कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है।
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। खासकर इसलिए क्योंकि यह हमला दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक पर हुआ है।
किस जहाज को बनाया गया निशाना?
हमले का शिकार हुए जहाज की पहचान मयूरी नारी (Mayuri Nari) नाम के कार्गो शिप के रूप में हुई है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह जहाज थाईलैंड का है और इसका संचालन प्रेशियस शिपिंग कंपनी द्वारा किया जाता है।
जहाज से जुड़ी अहम जानकारी
जहाज का नाम: मयूरी नारी
लंबाई: करीब 178 मीटर
वजन: लगभग 30,000 टन
गंतव्य: भारत का कांडला बंदरगाह (गुजरात)
कुल क्रू मेंबर: 23
यह जहाज ओमान के उत्तरी तट के पास से गुजर रहा था और भारत की ओर बढ़ रहा था।
अनजान प्रोजेक्टाइल से टकराया जहाज
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना 11 मार्च को हुई। रॉयल थाई नेवी और यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) दोनों ने पुष्टि की है कि जहाज पर किसी अनजान प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था। यह प्रोजेक्टाइल सीधे जहाज से टकराई, जिससे जहाज के हिस्सों में भारी नुकसान हुआ और उसमें आग लग गई।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने जहाज के नंबर और संरचना की जांच की, जो उनके आर्काइव में मौजूद तस्वीरों से मेल खाते हैं। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि हमला किसने किया और इसमें किस तरह के हथियार का इस्तेमाल हुआ।
कहां हुआ हमला?
हमला ओमान के उत्तरी तट से करीब 11 नॉटिकल मील दूर हुआ। शिप ट्रैकिंग वेबसाइट्स के अनुसार, उस समय जहाज बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा था। बताया गया कि, जहाज की स्पीड करीब एक नॉटिकल मील प्रति घंटा से थोड़ी ज्यादा थी। इसी दौरान अचानक प्रोजेक्टाइल जहाज से टकरा गई और जहाज में आग लग गई।
भारत ने जताई चिंता
इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को इस हमले की जानकारी मिली है और यह बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि, हमें 11 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में थाई कार्गो शिप मयूरी नारी पर हुए हमले की खबर मिली है। यह जहाज गुजरात के कांडला बंदरगाह की ओर जा रहा था। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान कार्गो जहाजों को निशाना बनाना बेहद गंभीर बात है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के हमलों में पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है। भारत ने साफ कहा कि कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
ईरान की IRGC ने क्या कहा?
इस हमले को लेकर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का भी बयान सामने आया है। IRGC के नेवी कमांडर अलीरेजा तंगसिरी ने दावा किया कि,
लाइबेरियाई ध्वज वाले कंटेनर जहाज एक्सप्रेस रोम
थाई कार्गो शिप मयूरी नारी
इन दोनों जहाजों को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने चेतावनी के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को ईरान से अनुमति लेनी होगी।
3 क्रू मेंबर लापता
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने बचाव अभियान शुरू किया। रेस्क्यू में ओमानी नेवी, रॉयल थाई नेवी और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस शामिल है। बचाव अभियान के दौरान 20 क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि, तीन लोग अभी भी जहाज पर मौजूद बताए जा रहे हैं और उन्हें निकालने की कोशिश जारी है।
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जांच में जुटी एजेंसियां
हमले में इस्तेमाल किए गए प्रोजेक्टाइल की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। रॉयल थाई नेवी ने कहा है कि, इस हमले की पूरी जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि-
- हमला किसने किया?
- प्रोजेक्टाइल किस प्रकार का था?
- क्या यह ड्रोन या मिसाइल हमला था?
- क्या जहाज को जानबूझकर निशाना बनाया गया?
अब तक किसी देश या संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यह पर्शियन गल्फ और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है।
इसकी अहमियत
- दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है।
- वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का महत्वपूर्ण मार्ग।
- एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का प्रमुख रास्ता।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरती है। इसलिए यहां किसी भी तरह का हमला वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
क्षेत्र में पहले से बढ़ा हुआ है तनाव
मिडिल ईस्ट में पिछले कुछ समय से तनाव बढ़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। इसी वजह से सुरक्षा कारणों से कई बार जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। बताया जा रहा है कि, इस समय इस समुद्री मार्ग से बहुत कम जहाज गुजर रहे हैं।
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अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा
समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर इस तरह के हमले बढ़ते हैं तो इसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। इसके कई कारण हैं-
- तेल और गैस सप्लाई बाधित हो सकती है।
- शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
- बीमा प्रीमियम महंगे हो सकते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार धीमा पड़ सकता है।











