'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ :ग्वालियर के सौरभ भारत ने लिखी है कहानी, रविवार को शहर में स्पेशल स्क्रीनिंग

ग्वालियर। शुक्रवार को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। अभिनेता मनोज वाजपेयी के दमदार अभिनय और फिल्म की प्रभावशाली कहानी ने दर्शकों को प्रभावित किया है। खास बात यह है कि इस फिल्म के लेखक ग्वालियर के युवा राइटर सौरभ भारत हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी के दम पर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
पीपुल्स समाचार से विशेष बातचीत में सौरभ भारत ने बताया कि आने वाले समय में उनके पांच नए प्रोजेक्ट बड़े पर्दे पर दर्शकों के सामने होंगे। मुंबई में वे क्रिप्टस नामक कंपनी का संचालन भी कर रहे हैं, जहां युवा लेखकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान किया जाता है।

सौरभ भारत
बीएसएफ स्कूल टेकनपुर में हुई प्रारंभिक शिक्षा
ग्वालियर में जन्मे और यहीं से शिक्षा प्राप्त करने वाले सौरभ भारत आज मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। उनकी स्कूली शिक्षा बीएसएफ स्कूल, टेकनपुर में हुई, जबकि उच्च शिक्षा एमपीसीटी डेंटल कॉलेज से प्राप्त की। बचपन से ही उन्हें कहानियां लिखने का शौक था और उन्होंने इसी जुनून को अपना पेशा बनाया।
'डॉक्टर जी' लिखी, आरजे भी रहे
इससे पहले भी वे आयुष्मान खुराना अभिनीत फिल्म ‘डॉक्टर जी’ के जरिए अपनी लेखन प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं। फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले सौरभ करीब एक वर्ष तक ग्वालियर में रेडियो जॉकी (आरजे) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और लगातार सफलता की नई इबारत लिखते गए।
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रविवार को ग्वालियर में होगी विशेष स्क्रीनिंग
सौरभ भारत ने बताया कि फिल्म ‘गवर्नर : द साइलेंट सेवियर’ की विशेष स्क्रीनिंग रविवार को ग्वालियर में आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर वे स्वयं उपस्थित रहेंगे और दर्शकों से फिल्म को लेकर उनकी प्रतिक्रिया जानेंगे।
फिल्म एक नजर में
‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ की कहानी भारत के वर्ष 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में मनोज वाजपेयी आरबीआई गवर्नर ए. वैंकटरमन्ना की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें उस दौर में देश की आर्थिक स्थिति संभालने की जिम्मेदारी मिलती है जब भारत आर्थिक संकट के गंभीर दौर से गुजर रहा होता है। विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम है, व्यवस्था के भीतर विरोध है और हर निर्णय का असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे कठिन समय में शांत, गंभीर और सिद्धांतवादी व्यक्ति किस तरह अपने फैसलों से देश को संकट से उबारने का प्रयास करता है, यही फिल्म की मुख्य कहानी है। फिल्म किसी पारंपरिक एक्शन हीरो की नहीं, बल्कि एक ऐसे अनसुने नायक की कहानी है जिसने पर्दे के पीछे रहकर देश के भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास किया।
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