पंजाब विधानसभा में SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र को घेरा

पंजाब सरकार ने SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में अब तक हुए बदलावों की जांच कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है। प्रस्ताव में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग भी की गई है।
मतदाता सूची में बदलावों की जांच कराने की मांग
प्रस्ताव में मांग की गई है कि SIR के तहत अब तक मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जांच कराई जाए। इसमें उन लोगों की जिम्मेदारी तय करने की बात भी शामिल है, जिन पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के आरोप हैं। इसके अलावा प्रस्ताव के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की गई है।
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सीएम मान ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने SIR को लेकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि SIR के जरिए 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के वोट काट दिए गए हैं। मान ने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव आयोग के माध्यम से लोगों के वोट कटवाती है और अपने समर्थकों के वोट मतदाता सूची में जुड़वाती है।
मुख्यमंत्री ने SIR को लोकतंत्र के खिलाफ बताया
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि SIR लोकतंत्र के खिलाफ है और लोकतंत्र को बचाने के लिए इस प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उसका कामकाज स्पष्ट और निष्पक्ष नहीं है। प्रस्ताव के जरिए पंजाब सरकार ने मतदाता सूची में बदलावों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग दोहराई है।
मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित हुई सदन की कार्यवाही
पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव को लेकर चर्चा होने के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। प्रस्ताव में SIR प्रक्रिया की जांच कराने, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने की मांग उठाई गई है। इस मुद्दे पर पंजाब सरकार ने मतदाता सूची में बदलावों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना पक्ष रखा है।




















