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अरुणाचल में चीन के साथ तनाव पर बड़ा बयान, सीमा पर भारत ने क्यों बढ़ाई तैनाती?

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव की खबरों के बाद सियासत तेज हो गई है। ITBP DG शत्रुजीत कपूर ने असाफिला और माजा क्षेत्रों में टकराव की स्थिति का जिक्र किया। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं। जानिए सीमा विवाद, ड्रोन सुरक्षा, गलवान झड़प और चीन के दावों से जुड़ी अहम बातें।
अरुणाचल में चीन के साथ तनाव पर बड़ा बयान, सीमा पर भारत ने क्यों बढ़ाई तैनाती?
अरुणाचल में भारत-चीन सैनिकों के बीच फिर तनाव! ITBP DG के खुलासे से मचा सियासी घमासान

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिक कई जगह आमने-सामने आ गए थे। कुछ स्थानों पर टकराव की स्थिति भी बनी। उनके मुताबिक, सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है। इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

अरुणाचल प्रदेश में कहां बना हुआ है तनाव?

ITBP के DG शत्रुजीत कपूर गुरुवार को आयोजित एक समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बताया कि जुलाई के अंत से अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा इलाकों में तनाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ। सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत ने भी अपनी तैनाती बढ़ाई है। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

बातचीत के बाद भी तनाव बरकरार

शत्रुजीत कपूर के मुताबिक, जुलाई से अब तक भारत और चीन के बीच तीन स्तरों पर अहम बैठकें हो चुकी हैं। इनमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC), विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत और कोर कमांडर स्तर की वार्ता शामिल हैं। इन बैठकों का उद्देश्य सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और तनाव कम करने के रास्ते तलाशना है। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में तनाव बना हुआ है। इसी बीच सितंबर में 18वां ब्रिक्स सम्मेलन भी आयोजित हुआ था, जिसमें शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे।

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ड्रोन और भूमिगत शेल्टर से मजबूत होगी सुरक्षा

ITBP के महानिदेशक ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ड्रोन ने लड़ाई के पुराने तरीकों को काफी बदल दिया है। इसे देखते हुए ITBP ड्रोन बनाने और दुश्मन के ड्रोन को रोकने की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। इसके अलावा, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए ITBP भूमिगत शेल्टर भी बना रही है। इनका उद्देश्य सीमा के पास तैनात जवानों और जरूरी संसाधनों की सुरक्षा करना है।

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर उठाए सवाल

ITBP DG के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार भारत-चीन सीमा पर हो रही घटनाओं को लेकर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि 19 जून 2020 को चीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का खामियाजा भारत को भुगतना पड़ रहा है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जब प्रधानमंत्री चीन के मामले में रियायतें दे रहे हैं, तब ITBP के महानिदेशक अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ हुए हालिया आमने-सामने के घटनाक्रम में भारतीय जवानों के प्रदर्शन की तारीफ कर रहे हैं। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि अगर ये घटनाएं जुलाई से हो रही थीं, तो देश को इसकी जानकारी अक्टूबर में क्यों मिली? उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर इस मामले में बयान नहीं देने का आरोप भी लगाया।

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गलवान घाटी में क्या हुआ था?

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का तनाव वर्ष 2020 में भी काफी बढ़ गया था। उस समय पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में चीनी सैनिकों की तैनाती बढ़ने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव गहरा गया था। भारत ने भी सीमा पर अपनी सैन्य तैनाती मजबूत की थी। 15 जून 2020 को गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई। चीन को भी अपने सैनिकों के मारे जाने की जानकारी देनी पड़ी, हालांकि उसने शुरुआत में इसकी पूरी संख्या सार्वजनिक नहीं की थी। गलवान की घटना के बाद से भारत और चीन के संबंधों में सीमा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

अरुणाचल प्रदेश पर चीन क्यों जताता है दावा?

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। चीन राज्य के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है। भारत ने चीन के इस दावे को लगातार खारिज किया है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। चीन वर्ष 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग स्थानों के चीनी नाम जारी कर चुका है। वर्ष 2023 में चीन ने 11 स्थानों के नाम जारी किए थे, जबकि 2024 में करीब 30 स्थानों के नाम सामने आए थे। भारत ने इन कदमों का विरोध करते हुए साफ किया है कि नाम बदलने से किसी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती। फिलहाल, ITBP DG के बयान ने अरुणाचल प्रदेश में सीमा सुरक्षा और भारत-चीन संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां सुरक्षा बल सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं कांग्रेस ने सरकार से हालिया घटनाओं पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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