गांधी जयंती पर रीवा केंद्रीय जेल से उम्रकैद की सजा काट रहे 7 कैदी रिहा, विशेष परिहार नीति का मिला लाभ

रीवा। वर्षों बाद जेल की सलाखों से बाहर आकर खुली हवा में सांस लेते ही बंदियों के चेहरे खुशी से खिल उठे, वहीं परिजनों से मिलते समय कई कैदियों की आंखें भर आईं। सभी बंदी भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और 14 वर्ष की वास्तविक सजा के साथ परिहार अवधि मिलाकर कुल 20 वर्ष की सजा पूरी कर चुके थे।
20 वर्ष की सजा पूरी करने पर मिली रिहाई
जेल प्रशासन के अनुसार, रिहा किए गए सभी बंदी भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। शासन के नियमों के मुताबिक, इन सभी ने 14 वर्ष की वास्तविक सजा और आचरण के आधार पर मिलने वाली परिहार अवधि को मिलाकर कुल 20 वर्ष की सजा पूरी कर ली थी।
ये भी पढ़ें: एमपी में आज शाम दिखेगा International Space Station, बिना दूरबीन के देख सकेंगे
सुधरे व्यवहार और अनुशासन को देखते हुए अनुशंसा
जेल में उनके सुधरे हुए व्यवहार और अनुशासन को देखते हुए रिहाई की यह अनुशंसा मंजूर की गई। वर्षों बाद जेल की सलाखों से बाहर आकर खुली हवा में सांस लेते ही बंदियों के चेहरे खुशी से खिल उठे, वहीं परिजनों से मिलते समय कई कैदियों की आंखें भर आईं।
तीन जिलों के कैदियों को मिला लाभ
मुक्त हुए बंदियों में विंध्य और शहडोल संभाग के तीन जिलों के कैदी शामिल हैं। इनमें शहडोल जिले के अमृतलाल बैगा (41) और श्रीराम बैगा उर्फ बोक्या (54), अनूपपुर जिले के बच्चेलाल बसोर (58) और शंकरदयाल चौकसे (56) तथा सिंगरौली जिले के शिवप्रसाद साकेत (49), राजेंद्र उर्फ लल्लू केवट (37) व गुलाब सिंह गोंड़ (38) शामिल हैं।
कानूनी और कागजी औपचारिकताएं पूरी कर रवाना किया
आवश्यक कानूनी और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जेल प्रबंधन ने सभी को समाज की मुख्यधारा में लौटने की शुभकामनाओं के साथ रवाना किया। रिहाई के बाद बंदी अपने परिजनों से मिले और वर्षों बाद परिवार के बीच लौटने पर भावुक नजर आए।




















