दिवाली पर पटाखे खरीदना हुआ महंगा, कीमतों में 25% तक बढ़ोतरी; कच्चे माल की बढ़ती लागत और सप्लाई का असर

इंदौर। व्यापारियों के मुताबिक, कच्चे माल की बढ़ती लागत उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों के कारण पटाखे महंगे हुए हैं। इस बार बाजार में नई वैरायटी और ग्रीन क्रैकर्स भी उपलब्ध हैं। महंगाई का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है, कोई बजट बढ़ा रहा है तो कोई पटाखों की संख्या कम कर रहा है।
पटाखों की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
अग्रवाल फायरवर्क्स के यश अग्रवाल ने बताया कि इस बार पटाखों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों और दूसरी सामग्रियों की लागत बढ़ने से निर्माताओं का खर्च बढ़ा है। सल्फर, एल्युमिनियम और सोडियम नाइट्रेट के अलावा पेपर, पैकेजिंग और माल ढुलाई की बढ़ती लागत का असर भी कीमतों पर पड़ा है।
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शिवकाशी से इंदौर पहुंचते हैं पटाखे
तमिलनाडु का शिवकाशी देश में पटाखा निर्माण का प्रमुख केंद्र है, जहां से इंदौर सहित मालवा-निमाड़ के बाजारों में बड़ी मात्रा में पटाखों की आपूर्ति होती है। इसके अलावा गुजरात, पंजाब और हरियाणा से भी पटाखे पहुंचते हैं। वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण आयात और सप्लाई चेन प्रभावित होने से रसायनों और माल ढुलाई का खर्च बढ़ा है।
बाजार में वायर चक्कर से लेकर स्काई शॉट तक की वैरायटी
महंगाई के बीच इस बार बाजार में पटाखों की कई नई वैरायटी भी देखने को मिल रही हैं। यश अग्रवाल के अनुसार, दुकानों पर वायर चक्कर, कोको लोको, इंडियन टैंक, हेलो किटी और स्काई शॉट जैसे उत्पाद उपलब्ध हैं। इसके साथ ही बाजार में ग्रीन क्रैकर्स भी रखे गए हैं।
पटाखों की पैकेजिंग में भी आया बदलाव
इस बार पटाखों के पैकेट पर तस्वीरों और ब्रांडिंग में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। यश अग्रवाल के मुताबिक, पहले देवी-देवताओं की तस्वीरों या भगवान के नाम वाले ब्रांड के पैकेट मिलते थे, लेकिन इस बार रेनबो, लेडी क्रैकर्स, फैंटम, चिड़िया, जोकर और लायन जैसी तस्वीरों वाले पैकेट उपलब्ध हैं।
विजयनगर से नौलखा तक लगीं अस्थायी दुकानें
इंदौर में विजयनगर, रीजनल पार्क, गोपुर चौराहा, नौलखा और कलेक्ट्रेट परिसर सहित अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी पटाखा दुकानें लगाई गई हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि दीपावली से पहले आखिरी दिनों में खरीदारी बढ़ेगी। हालांकि, पटाखों की बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहकों को इस बार अपने बजट में बदलाव करना पड़ रहा है।
किसी ने घटाई खरीदारी, तो किसी ने बढ़ाया बजट
विजयनगर के ग्राहक अभिषेक तिवारी ने बताया कि पिछले साल 5 हजार रुपए में जितने पटाखे खरीदे थे, उतनी खरीदारी के लिए इस बार 6 हजार रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। इसलिए उन्होंने खरीदारी कम कर बच्चों के लिए जरूरी पटाखे ही लिए हैं। वहीं, राऊ के शिवेंद्र पाटीदार ने बताया कि वे हर साल 8 से 10 हजार रुपए के पटाखे खरीदते हैं, लेकिन इस बार कीमतें बढ़ने के बावजूद कटौती नहीं की और उनका बिल 14 हजार रुपए का बना है।




















