वन्यजीव के सींग मिलने पर गाइड गिरफ्तार, विरोध में कोर्ट पहुंचीं आदिवासी महिलाएं

सोहागपुर। ग्राम सारंगपुर बीजाखारी में वन्यजीव के सींग के टुकड़े मिलने के मामले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की वन विभाग की टीम ने गाइड गोपाल वाडिवा को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल वारंट जारी होने के बाद पिपरिया जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई का विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं न्यायालय परिसर पहुंच गईं। उन्होंने वन विभाग के वाहन को घेरकर आरोपी की गिरफ्तारी को साजिश बताया। महिलाओं का आरोप है कि गोपाल को जानबूझकर फंसाया गया है। उनका दावा है कि किसी अन्य व्यक्ति ने उसके घर में वन्यजीव के सींग के टुकड़े रखकर उसे झूठे मामले में फंसाया। महिलाओं ने गोपाल को जेल ले जा रहे वन विभाग के वाहन के सामने खड़े होकर उसे रोकने का प्रयास किया।
सूचना मिलने पर सोहागपुर पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद बागरा बफर रेंजर विलास डोंगरे भी न्यायालय परिसर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे अपना पक्ष अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में रख सकती हैं, लेकिन न्यायालय की प्रक्रिया में बाधा डालना उचित नहीं है। समझाइश के बाद स्थिति सामान्य हुई।
25 अक्टूबर को घर से मिले थे सींग के टुकड़े
वन विभाग की टीम ने 25 अक्टूबर को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर ग्राम सारंगपुर निवासी गोपाल वाडिवा के घर पर कार्रवाई की थी। गोपाल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई पर्यटन जोन में गाइड के रूप में काम करता था। तलाशी के दौरान उसके घर से वन्यजीव के सींग के टुकड़े बरामद किए गए थे, जिन्हें वन विभाग ने जब्त कर लिया था। इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और संबंधित वन अधिनियम के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया। जांच के दौरान सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने गोपाल और उसकी पत्नी का गाइड पंजीयन भी निरस्त कर दिया।

अन्य संदिग्धों से भी होगी पूछताछ
मामले की जांच बागरा बफर रेंजर विलास डोंगरे कर रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है। घटनाक्रम से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मामले में अन्य व्यक्तियों या संदिग्धों की संलिप्तता सामने आने पर उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
आदिवासी महिला नेता ने लगाया साजिश का आरोप
आदिवासी महिला नेता सुरेखा शाह ने गोपाल वाडिवा को साजिश के तहत फंसाए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गोपाल और उसकी पत्नी ने हाल ही में गांव से अवैध शराब की दुकान हटाने के लिए महिलाओं के साथ आंदोलन और धरना दिया था। सुरेखा शाह का आरोप है कि इसी वजह से शराब माफिया ने उनके घर में सांभर के सींग के छोटे-छोटे टुकड़े लाल कपड़े में लपेटकर रखवाए। उनके मुताबिक, उस कपड़े में दो नींबू और सिंदूर भी रखा गया था, ताकि गोपाल को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के मामले में फंसाया जा सके। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
अवैध शराब के खिलाफ आदिवासी महिलाओं के आंदोलन का समर्थन और नेतृत्व करने वाले पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष पुष्पराज पटेल ने मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के घर में वन्यजीवों के अवशेष रखकर उसे फंसाया जा सकता है, तो इससे आम लोगों के मन में डर पैदा होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में लोग सामाजिक बुराइयों और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने से भी डर सकते हैं। पटेल ने आदिवासी क्षेत्रों में अवैध और जहरीली शराब के बढ़ते खतरे पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और परिवारों पर पड़ता है।




















