CJP Protest:संसद मार्च के बीच सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, बोले- युवा नेताओं की सांसदों से मुलाकात तक जारी रहेगा अनशन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के बीच सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति मिलने तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे।
सोशल मीडिया पर जारी किया संदेश
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देखते हुए उन्होंने अपना उपवास जारी रखने का फैसला लिया है।
उन्होंने लिखा कि उन्हें अस्पताल में प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने की अनुमति मिली है लेकिन उनकी मांग है कि युवा प्रतिनिधियों को सांसदों के सामने अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले में जल्द सकारात्मक पहल करेगी।
ये भी पढ़ें: क्या शिक्षा मंत्री की जाएगी कुर्सी? बंद कमरे में एक घंटे तक चली अमित शाह-धर्मेंद्र प्रधान की बैठक
सरकार और पुलिस से की अपील
वांगचुक ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान उकसावे के बावजूद छात्रों ने संयम और शांति बनाए रखी, जो सराहनीय है। उन्होंने सरकार और पुलिस प्रशासन से अपील की कि छात्रों को संसद के सामने अपनी शिकायत रखने की अनुमति दी जाए, ताकि विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदर्शनकारी आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे।
जंतर-मंतर पर बढ़ाई गई सुरक्षा
उधर, CJP के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और अतिरिक्त पाबंदियां लागू की गईं। जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेड पार करने से रोका। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हुई। प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग और लाठीचार्ज किए जाने की भी खबरें सामने आई हैं।
ये भी पढ़ें: Sonam Wangchuk Health Update: सोनम वांगचुक की तबीयत अब कैसी है? डॉक्टरों ने बताया हेल्थ बुलेटिन
मामले पर बनी हुई है नजर
सोनम वांगचुक के अनशन जारी रखने के ऐलान के बाद इस आंदोलन पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आगे की स्थिति किस दिशा में बढ़ती है।












