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एनिमल वेस्ट से तैयार किया स्मार्ट बैंडेज:शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय टीम की कंडक्टिव नैनोफाइबर बैंडेज, घाव को जल्द भरने में मिलेगी मदद

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर केशव राम आडिल और उनकी टीम ने इंसानों के बाल और मुर्गी के पंखों के कचरे से स्मार्ट बैंडेज तैयार किया है। इस बैंडेज की सहायता से किसी भी घाव को तीन गुना तेजी से भरा जा सकता है। टीम ने बायो मटेरियल वेस्ट का उपयोग कर कंडक्टिव नैनो फाइबर बैंडेज का निर्माण किया है।
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शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय टीम की कंडक्टिव नैनोफाइबर बैंडेज, घाव को जल्द भरने में मिलेगी मदद
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संजय सिंह राजपूत, राजनांदगांव। यह स्मार्ट बैंडेज बायो मटेरियल वेस्ट से तैयार किया गया है और ह्यूमन फ्रेंडली है। इसकी लागत सामान्य बैंडेज के बराबर ही रखी गई है। दो साल की रिसर्च के बाद इसे तैयार किया गया है और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है। यह बैंडेज गंभीर घावों को तेजी से भरने में मददगार साबित हो सकता है।

बायो वेस्ट से तैयार हुआ कंडक्टिव नैनो फाइबर बैंडेज

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर केशव राम आडिल और उनकी टीम ने इंसानों के बाल और मुर्गी के पंखों के कचरे से स्मार्ट बैंडेज तैयार किया है। टीम ने बायो मटेरियल वेस्ट का उपयोग कर कंडक्टिव नैनो फाइबर बैंडेज बनाया है। इसकी मदद से किसी भी घाव को तीन गुना तेजी से भरा जा सकता है। यह बैंडेज ह्यूमन फ्रेंडली है और इसमें वेस्ट होने वाले बायो मटेरियल का उपयोग किया गया है। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली के सहयोग से इस प्रोजेक्ट को पूरा किया गया है। यह रिसर्च इको फ्रेंडली भी है और पर्यावरण के अनुकूल है।

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दो साल की रिसर्च के बाद मिली सफलता

डॉ. आडिल के साथ पीएचडी स्कॉलर नितेश कुमार वर्मा और उनकी टीम ने करीब 2 साल की रिसर्च के बाद इस स्मार्ट बैंडेज को तैयार किया है। इस दौरान टीम ने कई स्तरों पर परीक्षण और प्रयोग किए। इस रिसर्च को स्प्रिंगर नेचर पत्रिका में पब्लिश किया गया है। टीम का मानना है कि यह तकनीक मेडिकल फील्ड में बड़ा बदलाव ला सकती है। फिलहाल इसके क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है और शुरुआती तौर पर इसे जानवरों पर प्रयोग किया जाएगा।

कम लागत में ज्यादा असरदार तकनीक

डॉ. आडिल के अनुसार सामान्य बैंडेज 1 से 2 रुपए में आम लोगों को उपलब्ध है और क्लिनिकल ट्रायल अप्रूव होने के बाद इस स्मार्ट बैंडेज की लागत दो से तीन रुपए ही आएगी। इस तरह यह तकनीक आम लोगों के लिए भी सुलभ रहेगी। यह बैंडेज कोशिकाओं को फास्ट ग्रोइंग में मदद करता है जिससे घाव जल्दी भरता है। खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों के लिए यह ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है जहां सामान्य बैंडेज उतने असरकारी नहीं होते हैं।

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डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर समाधान

डॉ. आडिल के अनुसार डायबिटीज के ज्यादातर मामलों में बैंडेज उतने असरकारी नहीं होते हैं, इसे देखते हुए ऐसे स्मार्ट बैंडेज पर काम करने का निर्णय किया गया जो नॉर्मल बैंडेज की तरह काम करे लेकिन गंभीर से गंभीर घाव को भरने में कम समय लगाए। बता दें कि करीब 2 साल की रिसर्च के बाद इसे तैयार किया गया है। यह बैंडेज तीन गुना असरदार है और जल्द ही क्लिनिकल ट्रायल शुरू होगा। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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