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SIR अवैध नहीं!चुनाव आयोग को इसे अपनाने का पूरा अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने दिए 5 बड़े सवाल के जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज मनमाने नहीं हैं। आधार कार्ड सहित 11 प्रकार के दस्तावेजों को मान्य माना गया है। अदालत ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट की जांच के लिए दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी प्रक्रिया है।
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चुनाव आयोग को इसे अपनाने का पूरा अधिकार, सुप्रीम कोर्ट ने दिए 5 बड़े सवाल के जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने SIR को वैध और संवैधानिक बताया है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को SIR करने का पूरा अधिकार है और यह प्रक्रिया मनमानी नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।

वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों पर चार हफ्ते में रिपोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश देते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनकी सूची चार हफ्ते के भीतर केंद्र सरकार को भेजी जाए। इसके बाद संबंधित एजेंसियां इस पर जांच कर तय प्रक्रिया के तहत निर्णय लेंगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों को नोटिस और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना जरूरी है।

SIR प्रक्रिया पर 10 महीने चली सुनवाई

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने करीब 10 महीने तक विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत के सामने पांच प्रमुख सवाल रखे गए थे जिनमें क्या चुनाव आयोग को SIR का अधिकार है, क्या यह कानून के अनुरूप है, क्या दस्तावेज मांगना सही है और हटाए गए वोटरों का भविष्य क्या होगा। कोर्ट ने सभी सवालों पर चुनाव आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया और कहा कि प्रक्रिया संतुलित और नियमों के भीतर है।

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दस्तावेजों की मांग पर क्या बोला कोर्ट

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज मनमाने नहीं हैं। आधार कार्ड सहित 11 प्रकार के दस्तावेजों को मान्य माना गया है। अदालत ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट की जांच के लिए दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी प्रक्रिया है, जिससे चुनाव प्रणाली अधिक पारदर्शी बनती है।

विपक्ष क्यों कर रहा विरोध?

विपक्षी दलों और याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर कड़ा विरोध जताया था। उनका आरोप था कि SIR के जरिए लोगों को वोटिंग अधिकार से वंचित किया जा सकता है। उनका यह भी कहना था कि 2003 से अब तक कई चुनाव हो चुके हैं, ऐसे में अचानक इस प्रक्रिया की जरूरत क्यों पड़ी। याचिकाकर्ताओं ने इसे “NRC जैसा अभ्यास” बताते हुए कहा कि इससे नागरिकता साबित करने का बोझ आम मतदाता पर डाल दिया गया है।

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किन राज्यों में हुआ SIR, कितने नाम कटे?

  • चुनाव आयोग ने बिहार से SIR प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी इसे लागू किया गया। असम में स्पेशल रिवीजन हुआ। रिपोर्ट के अनुसार करीब 2.65 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से चुनाव आयोग की शक्तियों को मजबूती मिली है, लेकिन राजनीतिक और कानूनी बहस अभी खत्म नहीं हुई है। जहां एक ओर इसे चुनाव सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे नागरिक अधिकारों से जोड़कर विवाद भी जारी है।

SIR पर 10 महीने की सुनवाई, कई याचिकाओं पर हुआ फैसला

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने करीब 10 महीने तक सुनवाई की। कई राज्यों से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए अदालत ने चुनाव आयोग के अधिकारों को सही ठहराया और कहा कि SIR प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की गई है।

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कोर्ट के सामने उठे 5 अहम सवाल और जवाब

1. क्या चुनाव आयोग के पास SIR करने की शक्ति है?

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR करने का अधिकार है। यह प्रक्रिया उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है और इसे गैरकानूनी नहीं माना जा सकता।

2. क्या SIR का कोई वैध उद्देश्य है और क्या यह सही प्रक्रिया है?

अदालत ने कहा कि SIR का उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ और पारदर्शी बनाना है। इसमें किसी तरह की मनमानी या असंतुलन नहीं पाया गया।

3. क्या यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के खिलाफ है?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया RP एक्ट का उल्लंघन नहीं करती, बल्कि इसके दायरे में रहते हुए ही लागू की गई है।

4. क्या चुनाव आयोग दस्तावेज मांग सकता है?

कोर्ट ने कहा कि आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज उचित हैं। आधार कार्ड समेत 11 दस्तावेजों को वैध माना गया है और यह प्रक्रिया पारदर्शिता के लिए जरूरी है।

5. जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटे हैं उनका क्या होगा?

कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों को संबंधित नागरिकता एजेंसी को भेजा जाए। प्रभावित लोगों को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिया जाएगा और चुनाव से पहले निर्णय सुनिश्चित किया जाएगा।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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