सीधी के बरही में एक ही जमीन पर 4 दावेदार, कई लोगों पर बेघर होने का खतरा
सीधी। इस विवाद की सीधी मार गरीब आदिवासियों पर पड़ी है, जहां जगवती कोल, रामसखा कोल और शकुंतला कोल समेत करीब 12 परिवारों के स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे यहां 100 साल से अधिक समय से निवास कर रहे हैं और तत्कालीन कलेक्टर अजीत जोगी के कार्यकाल में उन्हें इस जमीन के पट्टे दिए गए थे।
100 साल से रह रहे परिवार
प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे इस जमीन पर 100 साल से अधिक समय से निवास कर रहे हैं। 85 वर्षीय भागीरथी साकेत ने रुंधे गले से कहा कि उनका जन्म यहीं हुआ, लेकिन उम्र के अंतिम पड़ाव में अब उन्हें बेघर होने का डर सता रहा है।
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20 एकड़ से बढ़कर 250 एकड़ से ज्यादा जमीन का दावा
ग्रामीणों और सरपंच राजेश साकेत ने आरोप लगाया कि बैजनाथ द्विवेदी के पास पहले करीब 20 एकड़ जमीन थी, जो अब बढ़कर 250 एकड़ से अधिक दर्ज हो चुकी है। आरोप है कि इसमें कई शासकीय रकबे भी शामिल हैं और द्विवेदी द्वारा तहसीलदार न्यायालय से स्टे ले लिया गया, जिसके बाद गरीबों के आशियाने का काम ठप पड़ गया।
मारपीट और घर तोड़ने की कोशिश का आरोप
ग्रामीणों ने जमीन विवाद के बीच मारपीट और घर तोड़ने की कोशिश के भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जमीन को लेकर चल रहे विवाद और कोर्ट से मिले स्टे के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घरों का निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
बैजनाथ द्विवेदी ने नहीं दिया कोई जवाब
मामले में दूसरे पक्ष बैजनाथ द्विवेदी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने सामने आकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं, जमीन के रिकॉर्ड को लेकर वन विभाग और राजस्व विभाग की ओर से भी अलग-अलग स्थिति सामने आ रही है।
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वन विभाग और राजस्व रिकॉर्ड में अलग-अलग दावे
बहरी रेंज की रेंजर कविता साकेत ने कहा कि संबंधित जमीन वन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में जंगल के रूप में दर्ज है और यह विभाग के खसरे के अंतर्गत आती है। वहीं, तहसीलदार बहरी हिमांशु शुक्ला ने कहा कि रिकॉर्ड के मुताबिक यह राजस्व विभाग की लगभग 15 एकड़ जमीन है, जो पहले मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज थी, लेकिन वर्तमान रिकॉर्ड में बैजनाथ द्विवेदी के नाम दिख रही है। पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी।























