Krishna Janmasthan:श्रीकृष्ण जन्मस्थान में दान की गिनती पर बड़ा बदलाव, अब हर रुपये का हिसाब रखेंगे स्वतंत्र पर्यवेक्षक

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने मंदिर में आने वाले दान की गणना व्यवस्था को और मजबूत बनाने का फैसला लिया है। रविवार से लागू हुई नई व्यवस्था के तहत दानपात्र खोलने, नकदी की गिनती करने और सोना-चांदी के आभूषणों का मूल्यांकन करने के दौरान स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहेंगे। संस्थान का कहना है कि इस कदम से दान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा। मंदिर से जुड़े दुकानदारों की बैठक के बाद इस व्यवस्था को मंजूरी दी गई है।
दानपात्र से लेकर आभूषणों तक निगरानी
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने दान राशि की गणना को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब मंदिर में जब भी दानपात्र खोले जाएंगे, नकदी की गिनती होगी या सोना-चांदी के आभूषणों का वजन किया जाएगा, उस पूरी प्रक्रिया पर स्वतंत्र पर्यवेक्षक नजर रखेंगे। संस्थान का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य दान व्यवस्था को पूरी तरह साफ और जवाबदेह बनाना है, ताकि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का सही तरीके से रिकॉर्ड रखा जा सके।
दुकानदारों की बैठक के बाद लिया गया फैसला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पहले ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद रविवार शाम श्रीकृष्ण जन्मस्थान व्यवसायी मंडल के अध्यक्ष नंद किशोर की अध्यक्षता में दुकानदारों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मंदिर परिसर से जुड़े करीब 30 दुकानदार शामिल हुए। सभी की सहमति से यह प्रस्ताव रखा गया कि दान की गणना के समय दुकानदारों में से स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहें। संस्थान ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इसे तुरंत लागू कर दिया।
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CCTV और सुरक्षा व्यवस्था भी होगी मजबूत
नई व्यवस्था के तहत दान गणना कक्ष की निगरानी को भी और बेहतर किया जा रहा है। गणना प्रक्रिया के दौरान CCTV कैमरों की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। साथ ही कर्मचारियों को तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार काम करने के निर्देश दिए गए हैं। दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों की निगरानी के लिए सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहेंगे। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इससे पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना आसान होगा और किसी भी तरह की गलती या विवाद की संभावना कम होगी।
श्रद्धालुओं का भरोसा बढ़ाने की कोशिश
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी ताकत श्रद्धालुओं का विश्वास होता है। इसी विश्वास को बनाए रखने के लिए दान गणना प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी आस्था से दान करते हैं, इसलिए उसका हिसाब पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। नई व्यवस्था से दान के लेखा-जोखा में और अधिक स्पष्टता आएगी।
दान व्यवस्था पर उठे सवालों के बाद बढ़ी सख्ती
हाल के दिनों में मंदिरों की दान व्यवस्था को लेकर देशभर में चर्चा हुई है। इसी बीच श्रीकृष्ण जन्मस्थान में भी गणना प्रक्रिया को और मजबूत करने का फैसला लिया गया है। कुछ लोगों ने पहले दान राशि की गिनती को लेकर सवाल उठाए थे और जांच की मांग भी की थी। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया है।
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नियमित रूप से लागू रहेगी नई व्यवस्था
मंदिर प्रशासन के अनुसार अब हर बार दान राशि की गणना इसी नई प्रक्रिया के तहत की जाएगी। स्वतंत्र पर्यवेक्षक की मौजूदगी से दान की गिनती और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी, दुकानदारों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे मंदिर प्रशासन व श्रद्धालुओं के बीच विश्वास बढ़ाने वाला कदम बताया है।











