श्रावण में क्यों किया जाता है रुद्राभिषेक?पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने बताया महत्व

बेगमगंज की दीनदयाल कॉलोनी में 30 जुलाई से 3 अगस्त तक पंच दिवसीय रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन पंडित कमलेश कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को श्रावण मास और रुद्राभिषेक के महत्व के बारे में बताया।
भगवान शिव को क्यों प्रिय है श्रावण मास
पंडित कमलेश कृष्ण शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान भगवान शिव ने किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
क्या होता है रुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक का अर्थ भगवान शिव का वैदिक मंत्रों, विशेष रूप से श्रीरुद्रम के पाठ के साथ अभिषेक करना है। इसे भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
रुद्राभिषेक करने के लाभ
रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा-
- पापों का नाश और मन की शुद्धि होती है।
- ग्रह दोष और बाधाओं से राहत मिलती है।
- परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- रोग, भय और संकट दूर होते हैं।
- आयु, आरोग्य और यश में वृद्धि होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
रुद्राभिषेक का फल
शास्त्रों के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया रुद्राभिषेक मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। इससे धन-धान्य और वैभव में वृद्धि होती है। साथ ही, संतान सुख, पारिवारिक उन्नति और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।
श्रावण मास में क्या करना चाहिए
- प्रतिदिन या सोमवार को शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
- 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
- महामृत्युंजय मंत्र और रुद्राध्याय का पाठ करें।
- सात्विक भोजन, दान, सेवा और संयम का पालन करें।
- शास्त्रों में श्रावण मास का महत्व
शास्त्रों में कहा गया है-
'देवानामपि यथा विष्णुः, नदीनां यथा गंगा। तथा सर्वेषु मासेषु, श्रावणः श्रेष्ठ उच्यते॥'
अर्थात, जैसे देवताओं में विष्णु और नदियों में गंगा श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार सभी महीनों में श्रावण मास को सर्वोत्तम माना गया है।
हर-हर महादेव।












