CG News :61 हजार करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा: 22 हजार शेल कंपनियां बेनकाब, ऐसे चल रहा था फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

RAIPUR। देशभर में टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक का खुलासा हुआ है। पिछले छह वर्षों में 22 हजार से अधिक शेल कंपनियां पकड़ी गई हैं, जिनके जरिए 61 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी सामने आई है। फर्जी बिलिंग, कागजी लेनदेन और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दुरुपयोग के माध्यम से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। छत्तीसगढ़ भी इस नेटवर्क से अछूता नहीं रहा, जहां 170 से अधिक फर्जी कंपनियों का भंडाफोड़ हो चुका है।
22 हजार से ज्यादा शेल कंपनियां बेनकाब
देशभर में आयकर विभाग, केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और जीएसटी इंटेलिजेंस की संयुक्त कार्रवाई में हजारों फर्जी कंपनियों का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार ये कंपनियां केवल कागजों पर संचालित हो रही थीं और वास्तविक कारोबार से उनका कोई संबंध नहीं था।बवर्ष 2024-25 के दौरान ही 25,009 फर्जी कंपनियों का पता लगाया गया, जिनके माध्यम से 61,545 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई। इन कंपनियों का इस्तेमाल मुख्य रूप से फर्जी बिल जारी करने और अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के लिए किया जा रहा था।
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छत्तीसगढ़ में भी फैला था नेटवर्क
छत्तीसगढ़ में 170 से अधिक शेल कंपनियों की पहचान की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार इन कंपनियों ने करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स गबन को अंजाम दिया। वर्ष 2026 में भी राज्य और केंद्र की एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं और अब तक 25 से अधिक बड़े मामलों में छापेमारी और जांच की जा चुकी है।
सीजीएमएससी घोटाले में मिलीं 85 फर्जी फर्में
सीजीएमएससी घोटाले की जांच के दौरान ईओडब्ल्यू और ईडी की छापेमारी में शशांक चोपड़ा और उनके सहयोगियों से जुड़े ठिकानों पर 85 फर्जी फर्मों का पता चला। इन कंपनियों के जरिए लगभग 28.46 करोड़ रुपये के आईटीसी घोटाले को अंजाम दिया गया था।
शराब घोटाले में 200 बैंक खातों का इस्तेमाल
राज्य के बहुचर्चित 2800 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में भी शेल कंपनियों और बेनामी खातों का व्यापक उपयोग सामने आया। जांच में पता चला कि 200 से अधिक बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई और फर्जी होलोग्राम व लेबलिंग के माध्यम से अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
महादेव सट्टा एप का नेटवर्क भी शेल कंपनियों पर आधारित
भिलाई से संचालित महादेव सट्टा एप मामले में भी शेल कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई। करीब 20 हजार करोड़ रुपये के इस नेटवर्क में एजेंटों, बेनामी खातों और फर्जी कंपनियों के जरिए हवाला लेनदेन किया गया। जांच एजेंसियों ने करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का खुलासा किया है।
क्या होती है सेल कंपनी?
शेल कंपनी ऐसी कानूनी रूप से पंजीकृत इकाई होती है जिसका कोई वास्तविक व्यवसाय, कार्यालय या कर्मचारी नहीं होता। यह केवल दस्तावेजों और बैंक खातों तक सीमित रहती है। कई मामलों में इन्हें डमी निदेशकों और फर्जी पतों के आधार पर पंजीकृत कराया जाता है ताकि असली संचालकों की पहचान छिपी रहे।
कैसे चलता है टैक्स चोरी का खेल?
बिना माल की आपूर्ति किए फर्जी बिल जारी किए जाते हैं। इन बिलों के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया जाता है। काले धन को विभिन्न खातों में घुमाकर वैध आय के रूप में दिखाया जाता है। बेनामी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की जाती है। कई मामलों में संपत्तियां और वित्तीय देनदारियां छिपाने के लिए भी इन कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है।
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निष्कर्ष
देशभर में शेल कंपनियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक विशाल नेटवर्क को उजागर किया है। 61 हजार करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का खुलासा यह संकेत देता है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां अब पहले से अधिक सख्ती बरत रही हैं। आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे
होने की संभावना जताई जा रही है।












