भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश में 1300 कॉलेजों को 60 और 30 सीटों से इंटेक शुरू किया गया था। अब साढ़े सात लाख सीटें बढ़कर करीब दस लाख के आसपास पहुंच जाएंगी। नई शिक्षा नीति (NEP) लागू होने के बाद हर कॉलेज का UG (Under Graduate) का इंटेक न्यूनतम 120 सीट कर दिया गया है। जबकि PG (Post Graduate) का इंटेक 50 सीटों का कर दिया गया है। यह निर्णय पिछले सप्ताह स्थायी समिति की बैठक में किया गया है। सीटों की बढ़ोतरी होने पर कॉलेजों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। कॉलेजों में सीटें बढ़ने से प्रोफेसरों की नियुक्ति भी की जाएगी।
विभाग ने प्राइवेट और सरकारी कालेजों की इंटेक की न्यूनतम सीटों में दोगुनी बढ़ोतरी कर दी है। प्रदेश में UG और PG की सीटों का ग्राफ काफी ऊपर जाएगा। विभाग ने विश्वविद्यालयों के आदेश जारी कर दिए हैं। अब विवि कॉलेजों को एक-एक तलब कर उन्हें बढ़ी हुई सीटों की सूचना दे रहे हैं और बकाया राशि जमा करा रहे हैं। गत वर्षों से विभाग करीब साढ़े सात लाख सीटों पर प्रवेश कराता रहा है। इसमें सात-सात लाख सीटें रिक्त रही हैं। गत वर्ष हुई काउंसलिंग में अपनी प्रतिष्ठिा बचाने के लिए ओएसडी तुलसीराम दहायत ने UG और PG की सीटों को होल्ड कर दिया था। इससे रिक्त सीटों का ग्राफ जरूर नीचे आ गया।
प्रदेश में 1200 निजी और सरकारी कॉलेजों में साढ़े सात लाख सीटें हैं। उक्त सीटों पर प्रवेश कराने के लिए विभाग ने चार माह तक ऑनलाइन काउंसलिंग का आयोजन किया। चार माह चली प्रवेश प्रक्रिया के बाद पांच लाख आठ हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। अभी भी करीब ढाई लाख से ज्यादा सीटें रिक्त हैं। पीजी में एक लाख 32 हजार विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जबकि गत वर्ष एक लाख 15 हजार विद्यार्थियों के प्रवेश हुए थे। इसके बाद पीजी में करीब 60 हजार सीटें खाली हैं। गत वर्ष 2024-25 में यूजी में 3.91 लाख विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ था।
विभाग ने UG और PG का इंटेक बढ़ा दिया है। इससे उक्त सीटों के बढ़ने से कॉलेज संचालकों को प्रोफेसरों की नियुक्ति भी इसी हिसाब से करनी होगी। इसके लिए उन्हें कोड 28 के तहत योग्य प्रोफेसरों को नियुक्त करना होगा और उन्हें वेतन भी देना होगा। ऐसा नहीं करने की दशा में संबंधित विश्वविद्यालय उनके खिलाफ कार्रवाई भी करेगा। गत वर्ष मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्वयं विशेष सीएलसी आयोजित कराकर प्रवेश कराए हैं।
शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही कॉलेजों में इंटेक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थायी समिति में इसको लेकर कई निर्णय लिए गए हैं। अभी इसकी प्रक्रिया चल रही है, इस पर कुछ कहना जल्दवाजी होगी।
प्रबल सिपाहा, कमिश्नर, उच्च शिक्षा विभाग