सीहोर पुलिस का थाना परिवार अभियान, तनाव भूलकर योग-ध्यान में जुटे पुलिसकर्मी

सीहोर। पुलिस महानिरीक्षक भोपाल (देहात) जोन रुचिवर्धन मिश्र के निर्देश, डीआईजी राजेश सिंह चंदेल के मार्गदर्शन और एसपी सोनाक्षी सक्सेना के नेतृत्व में रविवार को जिले के सभी थानों और पुलिस कार्यालयों में अभियान आयोजित किया गया। दिन की शुरुआत हार्टफुलनेस योग, प्राणायाम और सामूहिक ध्यान से हुई। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को मानसिक तनाव से राहत देने के साथ उनमें सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित कार्यशैली विकसित करना रहा।
अफसर पहुंचे थानों पर,स्टाफ से किया सीधा संवाद
अभियान केवल योग और ध्यान तक सीमित नहीं रहा। वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद थानों में पहुंचकर पुलिसकर्मियों से संवाद किया और जमीनी स्तर पर पुलिसिंग की स्थिति जानी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीहोर डॉ. प्रशांत चौबे ने मंडी थाने पहुंचकर उपस्थित पुलिस बल से सीधे चर्चा की। उन्होंने स्टाफ की कार्यप्रणाली और सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी ली।
ये भी पढ़ें: 3 करोड़ का पशु शवदाह गृह तैयार:इंदौर में अब मृत पशुओं के लिए भी अंतिम संस्कार की व्यवस्था
शाहगंज और पार्वती थाने में भी हुआ ध्यान सत्र
इसी क्रम में एसडीओपी बुधनी रवि शर्मा थाना शाहगंज पहुंचे, जबकि एसडीओपी आष्टा दामोदर गुप्ता ने थाना पार्वती में पुलिसकर्मियों के साथ ध्यान सत्र में भाग लिया। अधिकारियों ने स्टाफ के साथ समय बिताने के साथ विवेचकों से चर्चा की और थाने में दर्ज मामलों की प्रगति की समीक्षा की। इससे अभियान में थाना परिवार की भावना को मजबूत करने का प्रयास दिखाई दिया।
अपराध समीक्षा में लापरवाही पर सख्ती
ध्यान और योग के बाद पुलिसिंग के मूल दायित्व पर भी गंभीरता से मंथन हुआ। अपराध समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने लंबित प्रकरणों की स्थिति जानी और विवेचकों को मामलों के तुरंत निराकरण के निर्देश दिए। विशेष रूप से ई-साक्ष्य और ई-विवेचना की प्रक्रिया को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रभावी ढंग से अपनाने पर जोर दिया गया।
पॉक्सो और साइबर अपराधों पर विशेष नजर
अधिकारियों ने पॉक्सो एक्ट और साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में निर्धारित एसओपी के तहत तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ऐसे मामलों में समय पर साक्ष्य संकलन, विवेचना और आवश्यक कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताते हुए अधिकारियों ने किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने को कहा। आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी संसाधनों और निर्धारित प्रक्रियाओं के बेहतर उपयोग पर भी जोर रहा।
100 दिन से लंबित सीएम हेल्पलाइन पर प्राथमिकता
अपराधों के साथ नागरिकों की शिकायतों के निराकरण को भी समीक्षा में प्रमुखता दी गई। अधिकारियों ने सीएम हेल्पलाइन की 100 दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संदेश स्पष्ट रहा कि शिकायत लेकर थाने तक पहुंचने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समय पर राहत और संतोषजनक कार्रवाई मिलना पुलिस की जिम्मेदारी है।
आदतन अपराधियों और वारंटों पर भी फोकस
अधिकारियों ने आदतन अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने और आवश्यकतानुसार बाउंड ओवर की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही लंबित वारंटों की शत-प्रतिशत तामीली पर भी विशेष जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण के लिए केवल घटना के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि संभावित अपराधों को रोकने के लिए प्रभावी प्रतिबंधात्मक कदम भी जरूरी हैं।
ये भी पढ़ें: ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ पर फिर विवाद, समय रैना ने बिहार पर किया मजाक, शेरॉन ने कश्मीर पर दिया जवाब…मच गया बवाल!
थाना परिवार से बेहतर पुलिसिंग की उम्मीद
प्रत्येक रविवार-थाना परिवार अभियान पुलिसकर्मियों के लिए केवल एक दिन की गतिविधि नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर बेहतर वातावरण बनाने की पहल के रूप में सामने आया। योग और ध्यान से जहां पुलिस बल को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास हुआ, वहीं अपराध समीक्षा ने यह भी सुनिश्चित किया कि संवेदनशील और स्वस्थ पुलिसकर्मी जनता की समस्याओं के प्रति अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारी निभा सकें। सीहोर पुलिस का यह प्रयास वर्दी के भीतर इंसान को मजबूत करने और उसी मजबूती को बेहतर पुलिसिंग में बदलने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा सकता है।




















