सीहोर में आउटसोर्स कर्मचारियों का आक्रोश, वेतन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सौंपा ज्ञापन

सीहोर। आउटसोर्स और ठेका प्रथा के तहत शासकीय विभागों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर मंगलवार को सीहोर में आक्रोश सामने आया। मध्यप्रदेश राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर डिप्टी कलेक्टर श्रीमती किरण वरवड़े को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिला श्रम अधिकारी के माध्यम से श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को भेजा गया। संघ ने कर्मचारियों को श्रम कानूनों के अनुरूप वेतन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिलाने की मांग की।
महीनों से वेतन लंबित, परिवारों पर आर्थिक संकट
संघ ने ज्ञापन में कहा कि जिले के विभिन्न शासकीय विभागों और कार्यालयों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को कई-कई महीनों तक वेतन नहीं मिल रहा है। समय पर मानदेय नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो रहा है। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के परिवार भी आर्थिक कठिनाइयों से प्रभावित हो रहे हैं।
न्यूनतम वेतन से ईपीएफ-ईएसआईसी तक की मांग
संघ ने मांग की कि आउटसोर्स कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआईसी), बोनस और अन्य वैधानिक लाभ निर्धारित समय पर उपलब्ध कराए जाएं। संघ ने ठेकेदारों और एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करते हुए श्रम नियमों का कड़ाई से पालन कराने की मांग की।
शोषण रोकने और जिम्मेदारी तय करने की मांग
संघ के जिला अध्यक्ष अरविन्द शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह सिसोदिया और प्रदेश महामंत्री प्रकाश पुंज चौधरी सहित पदाधिकारियों ने कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था के नाम पर कर्मचारियों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उनके श्रम का समय पर उचित भुगतान मिलना जरूरी है। इस दौरान संवाद प्रभारी रत्नेश शेव, जागृति ठाकुर, प्रकाश मालवीय, भूपेंद्र वर्मा, अंतर मीणा, मोहन मेवाड़ा, शुभम और हरीश राठौर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
नियमों के पालन पर श्रम विभाग की निगरानी
संघ ने बताया कि आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों को श्रम कानूनों का लाभ दिलाने के लिए श्रम विभाग ने नियोजकों को निर्देश जारी किए हैं। निर्धारित समय पर वेतन भुगतान के साथ इसकी रिपोर्ट महीने की 7 तारीख तक कार्यालय में देने का प्रावधान बताया गया है। विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के पंजीयन को भी जरूरी किया गया है।
उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की मांग
संघ ने श्रम विभाग से मांग की कि संस्थानों और ठेकेदार एजेंसियों का नियमित निरीक्षण किया जाए। यदि जांच में वेतन, ईपीएफ, ईएसआईसी या अन्य श्रम नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैधानिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित कराने से जुड़ी हैं।

















