दर्शन की आस लेकर आईं, धाम में थम गई सांसें, महाराष्ट्र की 75 वर्षीय महिला की मौत,कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालु की मौत से

सीहोर। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में दर्शन के लिए महाराष्ट्र से आई करीब 70 से 75 वर्षीय महिला श्रद्धालु की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। महिला की पहचान कौशल बाई कवड़े के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह धाम परिसर में विश्राम कर रही थीं, इसी दौरान अचानक सीने में दर्द हुआ और उनकी हालत गंभीर हो गई। परिजन उन्हें तत्काल उपचार दिलाने की कोशिश में जुटे, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। प्रारंभिक जानकारी में मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है।
नागपुर के पास से आई थीं कौशल बाई, दर्शन से पहले ही छाया मातम
मृतका महाराष्ट्र में नागपुर के आसपास के क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही हैं। वह परिजनों के साथ कुबेरेश्वर धाम दर्शन के लिए पहुंची थीं। धाम परिसर में कुछ समय विश्राम करने के दौरान अचानक सीने में दर्द उठने के बाद उनकी हालत बिगड़ी। देखते ही देखते धार्मिक यात्रा का माहौल मातम में बदल गया। साथ आए परिजनों और महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने शव को वापस महाराष्ट्र ले जाने के लिए निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था की है। आवश्यक चिकित्सकीय और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।
दिल का दौरा या साइलेंट अटैक?
परिजनों की ओर से बताया गया कि महिला को अचानक सीने में दर्द हुआ और इसके बाद उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई। स्थानीय स्तर पर इसे दिल का दौरा बताया जा रहा है। हालांकि मौत की अंतिम चिकित्सकीय पुष्टि पोस्टमार्टम या चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी। घटना ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि भारी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालुओं के पहुंचने वाले धार्मिक स्थलों पर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था कितनी तेजी से सक्रिय होती है।
एक मौत ने फिर बढ़ाई चिंता
कुबेरेश्वर धाम में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बड़े आयोजनों के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए तत्काल मेडिकल सहायता बेहद जरूरी हो जाती है। कौशल बाई की मौत के बाद श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ मेडिकल इमरजेंसी रिस्पॉन्स को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि इस घटना में चिकित्सा सहायता मिलने में कितनी देर हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पिछले साल भी मौतों और भगदड़ ने खींचा था ध्यान
कुबेरेश्वर धाम और आसपास के बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान पिछले वर्ष भी श्रद्धालुओं की मौत और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आई थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांवड़ यात्रा और धाम से जुड़े आयोजनों के दौरान सात श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इनमें रुद्राक्ष वितरण काउंटर पर भीड़ के बीच भगदड़ की घटना में दो महिलाओं की जान चली गई थी। भारी भीड़ के चलते कई किलोमीटर लंबा जाम भी लगा था। इन घटनाओं ने भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की थी।
पिछली घटनाओं के बाद इस बार प्रशासन ने कसी कमर
इस बार 24-25 अगस्त को होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। सीवन नदी घाट से कुबेरेश्वर धाम तक पूरे मार्ग को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर अधिकारियों की तैनाती की गई है। पुलिस, प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी अपने निर्धारित ड्यूटी प्वाइंट पर पहुंच चुके हैं। भीड़ बढ़ने की स्थिति में तत्काल नियंत्रण और यातायात को डायवर्ट करने की व्यवस्था भी तैयार रखी गई है।

800 बाहरी और करीब 400 स्थानीय पुलिसकर्मी संभालेंगे मोर्चा
कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा चेहरा पुलिस बल है। आसपास के जिलों से करीब 800 पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त बल तैनात किया गया है, जबकि सीहोर जिले के करीब 400 पुलिसकर्मी भी ड्यूटी में लगाए गए हैं। इसके अलावा होमगार्ड, एसडीआरएफ और अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी व्यवस्था में शामिल हैं। यानी कांवड़ यात्रा के दौरान करीब 1200 पुलिसकर्मियों का बड़ा सुरक्षा तंत्र मैदान में रहेगा। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी और फिक्स पिकेटिंग की व्यवस्था की गई है।
एसपी की सख्त ब्रीफिंग-लापरवाही मिली तो कार्रवाई तय
पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल को ब्रीफ करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जवानों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्क रहने और किसी भी सूचना पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का फोकस सिर्फ भीड़ संभालने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर भी लगातार निगरानी रखी जाएगी।
महिला श्रद्धालुओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष फोकस
कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। ऐसे में पुलिस ने महिला श्रद्धालुओं और बच्चियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। ड्यूटी पर तैनात जवानों को श्रद्धालुओं के साथ संयमित, विनम्र और शालीन व्यवहार करने के साथ-साथ किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की कोशिश है कि धार्मिक उत्साह के बीच सुरक्षा व्यवस्था किसी भी स्तर पर कमजोर न पड़े।
हाईवे से डायवर्जन तक पुलिस की पेट्रोलिंग
कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यातायात व्यवस्था की होगी। पिछले आयोजनों में लंबा जाम लगने के अनुभव के बाद इस बार हाईवे, मुख्य मार्गों और डायवर्जन रूट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मोबाइल पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थान पर वाहनों का दबाव बढ़ने से पहले यातायात को नियंत्रित किया जाए। पुलिस का संदेश साफ है-कांवड़ यात्रा के दौरान जाम और अव्यवस्था पर जीरो टॉलरेंस रहेगा।
सीवन घाट पर नदी में उतरने की मनाही, नलों से मिलेगा कांवड़ का जल
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सीवन नदी घाट पर विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से नदी में उतरकर जल लेने से पूरी तरह बचने की अपील की है। इसके लिए घाट पर बड़ी संख्या में नल लगाए गए हैं। पंप के माध्यम से सीवन नदी का पानी नलों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु नदी में उतरे बिना ही कांवड़ में जल भर सकेंगे। घाट पर बैरिकेडिंग, सुरक्षा दल और बोट की व्यवस्था भी रखी गई है।
ये भी पढ़ें: ऊना-इंदौर हिमाचल एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में चूहे का आतंक, 78 वर्षीय बुजुर्ग की नाक काटी
कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य, पार्किंग और आपातकालीन इंतजाम तैयार
कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देश पर कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश, पार्किंग और आपातकालीन व्यवस्थाओं को पूरा करने का दावा किया गया है। अधिकारियों को अपने-अपने सेक्टर में मौजूद रहकर लगातार निगरानी रखने के निर्देश हैं। यात्रा मार्ग पर सफाई दल, क्रेन और अन्य आवश्यक संसाधन भी तैयार रखे गए हैं। लगातार अनाउंसमेंट के जरिए श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी देने की व्यवस्था भी की गई है।
ये भी पढ़ें: इंदौर वंदे भारत का बढ़ेगा दायरा, अब बिलासपुर तक विस्तार का प्रस्ताव; बोर्ड की मंजूरी का इंतजार





















