मशाल कावड़ यात्रा खलघाट पहुंची, 11 दिन में 1310 किमी दूरी तय करेगा युवाओं का जत्था
धार। शनिवार को यात्रा इंदौर से खलघाट की ओर बढ़ी और रात्रि विश्राम के लिए नर्मदा तट पर बालाजी मंदिर पर विश्राम किया। सुबह प्रातः 5 बजे से महाराष्ट्र की ओर आगे बढ़ी और प्रातः 10 बजे तक जुलानिया के पास यात्रा पहुंच गई। यह यात्रा 11 दिन में पूरी होती है और कुल 1310 किमी की रहती है, जो चार राज्य उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र से होकर निकलती है।
7 वर्षों से निकाली जा रही मशाल कावड़ यात्रा
धार/खलघाट/आगरा से राजगढ़ महाराष्ट्र तक मशाल कावड़ यात्रा पिछले 7 वर्षों से निकाली जा रही है। यह यात्रा गरुड़झेप मुहिम संस्था पुणे से युवा टोली द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह हर युवा स्वराज के लिए खड़ा रहे, यह संकल्प के साथ निकाली जा रही है। वहीं शनिवार यात्रा इंदौर से खलघाट की ओर और रात्रि विश्राम के लिए नर्मदा तट पर बालाजी मंदिर पर विश्राम किया।
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11 दिन में पूरी होती है 1310 किमी की यात्रा
यात्रा में एडवोकेट मनीष आबा गोले द्वारा बताया गया कि यह यात्रा आगरा से राजगढ़ पुणे से पिछले 7 वर्षों से पैदल निकाली जा रही है। यात्रा 11 दिन में पूर्ण होती है। आज यात्रा का 6वां दिन है। यह यात्रा कुल 1310 किमी की रहती है।
आगरा से मशाल यात्रा निकालने का मुख्य उद्देश्य
आगरा से मशाल यात्रा निकालने का मुख्य उद्देश्य यह है कि, औरंगजेब द्वारा जब छत्रपति शिवाजी महाराज को आगरा में कैद किया गया था। तब छत्रपति इतने विराट संकट से डरे नहीं, पैर डगमगाए नहीं और अपनी सूझबूझ से बिना रक्त बहाए, आगरा से औरंगजेब की कैद से निकल कर राजगढ़ पहुंचे थे। छत्रपति शिवाजी महाराज की इसी विजय गाथा की आज जन-जन तक युवाओं को संदेश देना है।
हर वर्ष 200 से 300 युवा होते है शामिल
यात्रा के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है कि आज का युवा नशा, आई फोन और देश-धर्म विरोधी शक्तियों के चंगुल में आकर अपने जीवन को अपने धर्म को खत्म कर देता है। इस भारत में स्वराज लाने के लिए छत्रपति शिवराज महाराज और कई क्रांतिवीरों ने अपने प्राण अपने खून का कतरा-कतरा बहाया है, इसे व्यर्थ ना बहाये। इसी उद्देश्य के साथ हर वर्ष लगभग 200 से 300 युवाओं की टोली मशाल यात्रा आगरा से जलाकर राजगढ़ की ओर निकलती है और यह यात्रा 11वे दिन में राजगढ़ पुणे पहुंचती है।
























