सीहोर में फटी वर्दी पहनकर कोटवारों ने निकाली रैली, वेतन बढ़ाने और सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

सीहोर। कलेक्ट्रेट में अपर कलेक्टर बृजेश सक्सेना को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपकर तीन सूत्रीय मांगें पूरी करने की मांग की गई। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को राजधानी भोपाल तक ले जाने की चेतावनी भी दी गई।
फटी वर्दी पहनकर जताया विरोध
मध्य प्रदेश आजाद कर्मचारी कोटवार संघ के जिला अध्यक्ष छगनलाल मालवीय के नेतृत्व में निकली रैली में कोटवारों ने अपनी आर्थिक स्थिति और लंबित मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली है। बढ़ती महंगाई के बीच मामूली वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है। बच्चों के भविष्य और सम्मानजनक जीवन की चिंता उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है।
ये भी पढ़ें: MP के 38 हजार कोटवारों का आंदोलन तेज, 28 अक्टूबर तक अल्टीमेटम; भोपाल में करेंगे सत्याग्रह
22 अक्टूबर से हड़ताल, अब आंदोलन तेज करने की तैयारी
कोटवार संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 22 अक्टूबर से हड़ताल शुरू की थी। जिला मुख्यालय स्थित टाउन हॉल के सामने धरना देकर विरोध जताया जा रहा था। इससे पहले कोटवार अर्धनग्न होकर भी प्रदर्शन कर चुके हैं। संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। बुधवार की रैली इसी असंतोष का प्रदर्शन बनी।
सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन को सीहोर तहसील अध्यक्ष अमर सिंह मालवीय ने पढ़ा। ज्ञापन में कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोटवारों की मांगें पूरी करने का वादा किया था। संघ का कहना है कि उन्हें पुलिस जैसी वर्दी देकर सम्मानित तो किया गया, लेकिन अन्य मांगें अब भी लंबित हैं। कोटवारों की प्रमुख मांगों में सरकार की ओर से जीवनयापन के लिए दी गई सेवाभूमि का मालिकाना हक, किसान समग्र आईडी बनवाने में सुविधा, खाद-बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था, सरकारी कर्मचारी का दर्जा, वर्दी की राशि सीधे बैंक खाते में देने और वेतन बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। संघ का कहना है कि ग्रामीण स्तर पर शासन के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित आर्थिक सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
राजस्व कामकाज प्रभावित, ग्रामीणों को भी परेशानी
कोटवारों की हड़ताल का असर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिला। सीमांकन, बंटवारा और कब्जा दिलाने जैसी राजस्व संबंधी कार्यवाहियों के साथ ग्रामीणों तक सूचनाएं पहुंचाने का काम प्रभावित होने की बात सामने आई। कोटवारों की अनुपस्थिति से ग्राम स्तर पर प्रशासनिक गतिविधियों में दिक्कतें पैदा हुईं। ऐसे में आंदोलन का समाधान निकालना प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
कलेक्ट्रेट में अपर कलेक्टर बृजेश सक्सेना ने कोटवारों से चर्चा करते हुए स्थानीय स्तर की मांगों पर कार्रवाई करने और शासन स्तर की मांगों को संभागीय वरिष्ठ अधिकारियों तक भेजने का भरोसा दिया। हालांकि, संघ की प्रमुख मांगों पर अंतिम निर्णय कब होगा, यह स्पष्ट नहीं हुआ है। जिला अध्यक्ष छगनलाल मालवीय ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में संघ राजधानी भोपाल पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करेगा। प्रदर्शन में जिला उपाध्यक्ष कालूराम, तहसील अध्यक्ष अमर सिंह मालवीय, उपाध्यक्ष राकेश मालवीय सहित लालू सेन, राजमल, जितेंद्र, गोपाल सिंह, रामभरोस, मांगीलाल, राधेश्याम, आनंद, संतोष मालवीय, गोपाल सिंह अहिरवार, अजब सिंह सेवनिया और मांगीलाल खुशीलाल सहित बड़ी संख्या में कोटवार शामिल रहे।




















