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पराली जलाने पर रोक बेअसर, खेतों में पराली जला रहे किसान; कृषि विभाग पर उठे सवाल

सिवनी में शासन के निर्देशों और जिला प्रशासन की अपील के बावजूद खेतों में नरवाई (पराली) जलाने का सिलसिला जारी है। प्रशासन किसानों को नरवाई नहीं जलाने की समझाइश दे रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव नजर नहीं आ रहा है।
पराली जलाने पर रोक बेअसर, खेतों में पराली जला रहे किसान; कृषि विभाग पर उठे सवाल
पराली जलाने पर रोक बेअसर

सिवनी। किसानों का कहना है कि नरवाई प्रबंधन के लिए जरूरी संसाधन खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं, भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने कृषि विभाग को किसानों तक पहुंचने और उन्हें जरूरी सलाह और यंत्र उपलब्ध कराने की नसीहत दी है।

नरवाई जलाने का सिलसिला जारी

सिवनी जिले में नरवाई जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। शासन के निर्देशों और जिला प्रशासन की अपील के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है, जिससे प्रशासन की निगरानी और व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

किसानों तक नहीं पहुंच रहे जरूरी संसाधन

किसानों का कहना है कि प्रशासन नरवाई प्रबंधन के डेमो तो दिखाता है, लेकिन जरूरी संसाधन खेतों तक नहीं पहुंच पाते। अगली फसल की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलने के कारण किसानों के सामने नरवाई जलाने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचता।

विधायक दिनेश राय मुनमुन ने कृषि विभाग को दी नसीहत

भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने कहा कि कृषि विभाग किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है और न ही उन्हें जरूरी सलाह और यंत्र उपलब्ध करा पा रहा है। इसी कारण किसान खेतों में आग लगा रहे हैं। उन्होंने विभाग से किसानों तक पहुंचकर आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।

ये भी पढ़ें: नरवाई जलाने की जरूरत नहीं, खेत में ही खाद बनेगी पराली; किसानों को मिल रहा आधुनिक यंत्र का मौका

किसानों से आग नहीं लगाने की अपील

विधायक दिनेश राय मुनमुन ने किसानों से अपील की है कि वे खेतों में आग न लगाएं। इससे आग लगने की घटनाओं और प्रदूषण से बचाव किया जा सकता है। नरवाई जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसानों का सहयोग जरूरी है।

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जुर्माने के बावजूद नहीं रुक रहा नरवाई जलाना

नियमानुसार नरवाई जलाने के दोषी किसानों के खिलाफ जुर्माने सहित अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद घटनाएं सामने आ रही हैं। अब जरूरत केवल कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि किसानों को वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराने की भी है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ खेती का काम प्रभावित न हो।

Umesh Shrivastava
By Umesh Shrivastava

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