Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

किसानों की जमीन से सरकारी फंड तक... जौहर यूनिवर्सिटी मामले में ED को क्या-क्या मिला?

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति ED ने अटैच की है। आखिर यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगे पैसे का हिसाब जांच एजेंसी को क्यों नहीं मिला?
किसानों की जमीन से सरकारी फंड तक... जौहर यूनिवर्सिटी मामले में ED को क्या-क्या मिला?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। इन संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि इनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान समेत अन्य लोगों के खिलाफ चल रही जांच के तहत की गई है। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और विकास में बड़ी रकम का इस्तेमाल हुआ, लेकिन उसके वैध स्रोतों का पर्याप्त हिसाब नहीं मिला।

किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोपों से शुरू हुई जांच

रामपुर के गांव सिंहानखेड़ा स्थित जौहर नगर में यूनिवर्सिटी का कैंपस है। इसकी जमीन और इमारतें मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अधीन हैं। ED के मुताबिक, ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वही इसे नियंत्रित करते हैं। आजम खान यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति भी हैं। जांच एजेंसी ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर PMLA के तहत जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया।

रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैले शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर भी कथित तौर पर अवैध कब्जा किया गया था। यह जमीन ट्रस्ट को लीज पर दी गई थी, लेकिन बाद में शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक ने लीज रद्द कर दी। ED के अनुसार, इसके बावजूद जमीन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के लिए किए जाने का आरोप है। बाद में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने जिला प्रशासन के जरिए जमीन का कब्जा वापस ले लिया।

सरकारी ठेकों का पैसा यूनिवर्सिटी में लगाने का आरोप

ED की जांच में दावा किया गया कि सरकारी कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के निर्माण और विकास में किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों के जरिए भी पैसा ट्रस्ट तक पहुंचाया गया। आरोप है कि सरकारी ठेकों से मिले भुगतान का एक हिस्सा बाद में ट्रस्ट को दान के रूप में दिया गया।

ED ने अपनी जांच से जुड़ी जानकारी PMLA की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की थी। इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में FIR संख्या 0224/2026 दर्ज की गई। इसमें आजम खान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 और 13 के तहत मामला दर्ज किया गया।

28 अन्य FIR भी जांच के दायरे में

ED ने रामपुर पुलिस की ओर से आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज 28 अन्य FIR को भी जांच में शामिल किया है। एजेंसी के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इन मामलों में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 में रामपुर शहर में कई परिवारों के मकानों को बुलडोजर से गिराया गया था। इनमें से कई परिवार वक्फ संपत्तियों पर किरायेदार के रूप में रह रहे थे। शिकायतों में आरोप है कि मकानों में रहने वाले लोगों के साथ मारपीट की गई, उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी गई और नकदी, गहने व मवेशी लूट लिए गए।

ED के मुताबिक, इन मामलों में यह आरोप भी शामिल है कि ध्वस्त मकानों का मलबा ट्रकों के जरिए जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचाया गया। इसके अलावा रामपुर नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनों को भी कथित तौर पर यूनिवर्सिटी परिसर में इस्तेमाल के लिए भेजा गया।

ठेकेदारों के बयान में क्या सामने आया?

ED के मुताबिक, जांच में सामने आया कि रामपुर के कुछ ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों से जुड़े धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया। एजेंसी का दावा है कि एक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने बयान में बताया कि कंपनी को लोक निर्माण विभाग (PWD) से करीब 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। आरोप है कि ठेकों की कुल राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया। 

एक अन्य फर्म के साझेदारों ने कथित तौर पर आजम खान के प्रभाव में काम करने और ट्रस्ट को 40 लाख रुपये दान देने की बात स्वीकार की। ED इन लेन-देन को सरकारी ठेकों और ट्रस्ट को मिले दान के बीच संभावित संबंध के तौर पर देख रही है। जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि आयकर विभाग ने इसी तरह के निष्कर्षों के आधार पर आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है।

सरकारी फंड से यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए काम

ED की जांच में यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में विधायक और विधान परिषद सदस्य क्षेत्र विकास निधि (MLA/MLC Local Area Development Funds) से करीब 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए जाने की बात सामने आई। एजेंसी के मुताबिक, ये काम उत्तर प्रदेश जल निगम ने किए थे। उस समय आजम खान जल निगम के अध्यक्ष थे। इसके अलावा मेरठ की दो शैक्षणिक संस्थाओं की ओर से ट्रस्ट को 6.24 करोड़ रुपये का दान दिए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। ED का आरोप है कि इन संस्थाओं से दान हासिल करने में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में पंडाल, OBC लड़कों के हॉस्टल और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का शिकंजा, 1,170 करोड़ की संपत्तियां अटैच

सरकारी पंडाल का मालिकाना हक यूनिवर्सिटी को देने का आरोप

ED के मुताबिक, वर्ष 2015 में पंडाल निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। उस समय जारी सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि पंडाल का मालिकाना हक उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के पास रहेगा। इसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता था। साथ ही राज्य सरकार को इसका इस्तेमाल मुफ्त में करने की सुविधा दी जानी थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2016 में जारी एक अन्य सरकारी आदेश के जरिए इन शर्तों में बदलाव कर दिया गया। इसके बाद पंडाल का मालिकाना हक जौहर यूनिवर्सिटी को दे दिया गया और राज्य सरकार को मुफ्त इस्तेमाल की सुविधा देने वाली शर्त भी हटा दी गई।

ED का कहना है कि इस बदलाव के कारण सरकारी धन से बनी संपत्ति निजी यूनिवर्सिटी की संपत्ति में बदल गई। वर्ष 2015 और 2016 में ये आदेश जारी होने के समय आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उनके पास नगर विकास विभाग और उत्तर प्रदेश जल निगम से जुड़े विभागीय दायित्व थे।

499 करोड़ की लागत, वैध स्रोतों से सिर्फ 72.63 करोड़ का हिसाब

ED ने यूनिवर्सिटी परिसर की जमीन और इमारतों की लागत का आकलन भी कराया। जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर की 59 इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वहीं, 114 बिक्री विलेखों के जरिए खरीदी गई जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया। इस तरह पूरे परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई। दूसरी ओर, ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में यूनिवर्सिटी के निर्माण और जमीन खरीद पर 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया था। ED ने इसमें शामिल 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक बताया। इसके बाद ट्रस्ट का वास्तविक खर्च 66.03 करोड़ रुपये माना गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, अन्य वैध स्रोतों को मिलाकर भी यूनिवर्सिटी परिसर की कुल लागत में से केवल 72.63 करोड़ रुपये का ही हिसाब मिल सका। इस तरह 426.46 करोड़ रुपये की राशि का वैध स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया।

426.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच

ED ने इस 426.46 करोड़ रुपये की रकम को कथित अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) माना है। एजेंसी के अनुसार, ट्रस्ट के पदाधिकारी इस रकम के वैध स्रोत के बारे में संतोषजनक जानकारी नहीं दे सके। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों में 426.46 करोड़ रुपये के बराबर की संपत्ति को PMLA के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। ED ने बताया कि अटैच की गई संपत्ति का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि उसका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है। यह कार्रवाई फिलहाल अस्थायी कुर्की है। मामले में जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।

इससे पहले 19 अगस्त 2026 को ED ने जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जांच एजेंसी के मुताबिक आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे। अब जांच और संपत्ति के मूल्यांकन के आधार पर जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई की गई है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

Latest Posts