हाई कोर्ट तय करेगा कैसे वापस हो सकेंगे MP/MLA के मुकदमे, 4 नवंबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2020 से चल रहे मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने इस मुद्दे पर 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में विचार करने की बात कही। राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश में फिलहाल जनप्रतिनिधियों से जुड़े 15 आपराधिक मामले लंबित हैं।
मुकदमा वापसी पर किसका होगा अंतिम फैसला?
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सवाल उठा कि अगर सरकार दंड प्रक्रिया संहिता (दंप्रसं) की धारा 321 के तहत मुकदमा वापस लेने का निर्णय करती है, तो उस पर अंतिम फैसला विशेष न्यायालय करेगा या हाईकोर्ट। डिवीजन बेंच ने कहा कि इस कानूनी मुद्दे पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2020 में दर्ज हुई याचिका
अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों की निगरानी करने के निर्देश दिए थे। इसी के तहत 22 सितंबर 2020 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दर्ज की गई थी।
प्रदेश में अब 15 आपराधिक मामले लंबित
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने अदालत को बताया कि पिछली स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 19 मामले लंबित थे। इनमें से तीन मामलों का निराकरण विशेष अदालतों ने किया और एक मुकदमा हाईकोर्ट से खारिज हो गया, जिसके बाद अब 15 मामले लंबित हैं। बेंच ने सरकार से इन मामलों की ताजा स्थिति पेश करने को कहा।
एक आरोपी का मुकदमा वापस होने पर बाकी को भी लाभ?
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने सवाल किया कि अगर किसी मामले में पांच आरोपी हैं और उनमें से एक सांसद या विधायक है, तो सरकार द्वारा उसका मुकदमा वापस लेने पर लाभ केवल जनप्रतिनिधि को मिलेगा या सभी पांच आरोपियों को। हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने कहा कि मुकदमा वापसी का लाभ पांचों आरोपियों को मिलेगा।
4 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता संजय के. अग्रवाल, अधिवक्ता अहादुल्ला उस्मानी और रविशंकर पटेल ने भी अपनी दलीलें रखीं। हाईकोर्ट अब 4 नवंबर को अगली सुनवाई में मुकदमा वापसी के अधिकार और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर विचार करेगा।




















