9 साल बाद फिर बना दुर्लभ संयोग, 14 से 25 सितंबर तक 12 दिन विराजेंगे गणपति, 17 को तीन महायोग

सीहोर। विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति और प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार गणेश भक्तों के लिए उत्सव और भी खास रहने वाला है। पंचांग की तिथियों में विस्तार के कारण गणेशोत्सव सामान्य 10 दिनों के बजाय 12 दिनों तक मनाया जाएगा। 14 सितंबर सोमवार को गणेश चतुर्थी पर घर-घर और पूजा पंडालों में मिट्टी से निर्मित पार्थिव गणेश विराजेंगे, जबकि 25 सितंबर शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को विदाई दी जाएगी। इससे पहले वर्ष 2017 में ऐसा संयोग बना था।
14 सितंबर को घर-घर विराजेंगे प्रथम पूज्य
भगवान श्रीगणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इस वर्ष गणेश जन्मोत्सव 14 सितंबर सोमवार को चित्रा नक्षत्र से प्रारंभ होकर 25 सितंबर शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। चतुर्थी के दिन श्रद्धालु अपने घरों और पूजा स्थलों पर मिट्टी से निर्मित पार्थिव श्रीगणेश की विधि-विधान से स्थापना कर महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। भगवान को लड्डू, मोदक और दूर्वा अर्पित कर भक्त मंगलमूर्ति का आशीर्वाद लेंगे।
तिथियों के विस्तार से बढ़े गणेशोत्सव के दिन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचांग में तिथियों का निर्धारण सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर होता है। प्रत्येक तिथि की अवधि समान नहीं होती। इस बार कुछ तिथियों की अवधि 24 घंटे से अधिक होने के कारण चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक का क्रम 14 से 25 सितंबर तक पहुंच रहा है। यही वजह है कि इस बार गणेशोत्सव 12 दिनों का रहेगा। लंबे उत्सव से गणेश भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
17 सितंबर को तीन शुभ योगों का महासंयोग
गणेशोत्सव के बीच 16 और 17 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग रहेगा। वहीं 17 सितंबर को इनके साथ रवि योग भी रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. गणेश शर्मा के अनुसार तीनों योगों का एक साथ होना विशेष माना जाता है। इस दौरान पूजा-अर्चना, जप, अनुष्ठान और धार्मिक कार्यों को शुभ फलदायी माना गया है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान गणेश की आराधना कर सुख-समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना करेंगे।
षष्ठी से अष्टमी तक भी तिथियों का विशेष संयोग
इस बार गणेशोत्सव के दौरान तिथियों का क्रम भी विशेष रहेगा। 16 और 17 सितंबर को षष्ठी तिथि रहेगी। इसके बाद 18 सितंबर को सप्तमी और अष्टमी तिथि का संयोग रहेगा, जबकि 19 सितंबर को भी अष्टमी तिथि मान्य होगी। पंचांग की इन विशेष स्थितियों के कारण इस वर्ष का गणेशोत्सव धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें: खाटू श्यामजी मंदिर में VIP दर्शन के नाम पर ठगी, गिरोह का सरगना गिरफ्तार
प्राचीन गणेश मंदिर में 12 दिन लगेगा मेला
सीहोर के विक्रमकालीन प्राचीन गणेश मंदिर में इस बार 12 दिवसीय मेले का आयोजन होगा। हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन 12 दिन का उत्सव होने से इस बार भीड़ और आस्था का रंग और गहरा दिखाई देने की उम्मीद है। मंदिर में प्रतिदिन भगवान गणेश का आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा। मेले की तैयारियां अगले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है।
दूसरे शहरों और राज्यों से भी आएंगे श्रद्धालु
प्राचीन गणेश मंदिर में बप्पा के दर्शन के लिए सीहोर के अलावा भोपाल, इंदौर और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी भक्तों के आने की संभावना है। 12 दिन तक चलने वाले मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ बाजार और आसपास के क्षेत्र में भी उत्सव जैसा माहौल बनेगा। गणेश भक्तों के लिए यह केवल पर्व नहीं, बल्कि परिवार, आस्था और उमंग को जोड़ने वाला अवसर होगा।
गणेशजी के 12 नामों का स्मरण होगा फलदायी
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उनके 12 नामों सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्ननाशन, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन का स्मरण करना चाहिए। गणेश चालीसा, गणेश अथर्वशीर्ष और संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी श्रद्धालु कर सकते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से की गई गणेश आराधना जीवन के विघ्नों को दूर कर मंगल का मार्ग प्रशस्त करती है।
ये भी पढ़ें: ‘अगर मैं आपका स्टूडेंट होता...’ PM ने मांगी टीचर से सलाह, पूछा- पब्लिक स्पीकिंग कैसे सुधारूं? मिला ये मंत्र!
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की मान्यता
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन निषेध की धार्मिक मान्यता भी है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगने का भय माना गया है। यदि भूलवश चंद्र दर्शन हो जाए तो शास्त्रों में वर्णित स्यमंतक मणि की कथा सुनने की परंपरा बताई गई है। ऐसे में भक्त सावधानी के साथ गणेश चतुर्थी का पर्व मनाएंगे और बप्पा से सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना करेंगे।




















