हरदा से रूस तक पहुंचा अंशुल का हुनर, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का किया प्रतिनिधित्व

हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले के लिए गर्व का एक और मौका सामने आया है। भुआणा क्षेत्र के युवा अंशुल दुगाया ने रूस के व्लादिवोस्तोक में आयोजित 11वें ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन 1 से 4 सितंबर 2026 तक आयोजित हुआ। इसमें अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों ने भारत-रूस संबंधों, संस्कृति, व्यापार, आर्थिक सहयोग और भविष्य की साझेदारी जैसे विषयों पर चर्चा की।
तिरंगे के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखे अंशुल
रेलवां गांव के रहने वाले अंशुल दुगाया ने फोरम में भारत की सांस्कृतिक विविधता और युवाओं की क्षमता से जुड़े विषयों पर संवाद में हिस्सा लिया। इसके अलावा भारत और रूस के बीच सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा में शामिल हुए। रूस में आयोजित इस फोरम में तिरंगे के साथ अंशुल की मौजूदगी हरदा जिले के लिए गौरव का क्षण रही।
हरदा के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
कृषि और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले हरदा जिले से निकलकर अंशुल का अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना खास उपलब्धि माना जा रहा है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि छोटे शहर और गांवों के युवा भी मेहनत और प्रतिभा के दम पर वैश्विक मंच तक पहुंच सकते हैं। अंशुल की सहभागिता से जिले के उन युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी, जो शिक्षा, तकनीक, व्यापार, उद्यमिता, संस्कृति और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं।
आर्थिक सहयोग से युवा नेतृत्व तक हुई चर्चा
ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में केवल व्यापार और आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संबंध, युवा नेतृत्व, नई संभावनाएं और भविष्य की वैश्विक साझेदारी जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। अंशुल ने इन चर्चाओं में भाग लेकर हरदा की युवा प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
अशोक गुर्जर ने दी बधाई
भुआणा प्रांतीय गुर्जर महासभा के पूर्व महासचिव अशोक गुर्जर ने अंशुल दुगाया और उनके परिवार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भुआणा की धरती के युवा का रूस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना पूरे हरदा जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि अंशुल की उपलब्धि बताती है कि हरदा की प्रतिभा अब प्रदेश और देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही है। अशोक गुर्जर ने अंशुल के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह आने वाले समय में भारत, मध्य प्रदेश और हरदा का नाम और ऊंचा करेंगे। भुआणा से व्लादिवोस्तोक तक अंशुल की यह यात्रा हरदा के युवाओं के लिए उपलब्धि के साथ नई प्रेरणा भी है।




















