सीहोर: भाऊखेड़ी में बनेगा राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र, 20 हेक्टेयर जमीन आवंटित

सीहोर। भाऊखेड़ी में आवंटित 20 हेक्टेयर जमीन का उपयोग कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना और सोयाबीन से संबंधित अनुसंधान गतिविधियों के लिए किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान की गतिविधियों के विस्तार से जिले में वैज्ञानिक खेती को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है। अब किसानों को अनुसंधान और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि तकनीक और खेत के बीच की दूरी कम होगी।
खेत में उतरेगा विज्ञान, किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
सोयाबीन उत्पादन में सिर्फ मेहनत पर्याप्त नहीं है। बदलता मौसम, मिट्टी की गुणवत्ता, रोग, कीट और बढ़ती लागत किसानों के सामने लगातार चुनौती खड़ी करते हैं। ऐसे समय में अनुसंधान केंद्र किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक वैज्ञानिक समाधान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फसल की बुवाई से लेकर प्रबंधन और कटाई तक बेहतर तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।
Ambikapur: असम में BSF जवान की संदिग्ध मौत से सनसनी, कैंप से लापता होने के बाद गांव के पास मिला शव
उन्नत बीज और नई किस्मों पर होगा बड़ा फोकस
सोयाबीन की पैदावार बढ़ाने में गुणवत्तापूर्ण बीज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से किसानों को सोयाबीन की उन्नत और नई किस्मों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों के प्रसार की दिशा में काम किया जाएगा। स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के विकास और उपयोग को बढ़ावा मिलने से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने की उम्मीद है।
बीमारी और कीट ने घेरा तो वैज्ञानिक समाधान मिलेगा
सोयाबीन की फसल को रोग और कीट प्रकोप से बड़ा नुकसान होता है। कई बार सही पहचान और समय पर नियंत्रण नहीं होने से पूरी फसल प्रभावित हो जाती है। अनुसंधान केंद्र के माध्यम से किसानों को रोग और कीट की पहचान, नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय और दवाओं के संतुलित उपयोग की जानकारी मिल सकेगी। इससे फसल बचाने के साथ अनावश्यक दवा और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
बदलते मौसम के बीच आधुनिक खेती बनेगी कवच
मौसम में लगातार हो रहे बदलावों ने किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी की है। कभी बारिश की कमी तो कभी अतिवृष्टि और कभी रोग-कीट का प्रकोप फसल की पूरी गणित बिगाड़ देता है। ऐसे दौर में आधुनिक कृषि तकनीक, बेहतर फसल प्रबंधन और वैज्ञानिक सलाह किसानों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बन सकती है। केंद्र के जरिए किसानों को आधुनिक उपकरणों और उत्पादन पद्धतियों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
करीब 50 लाख किसानों से जुड़ा है राष्ट्रीय संस्थान
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबंधित संस्थान है। सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से इसकी गतिविधियां देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। ऐसे संस्थान की गतिविधियों का सीहोर तक विस्तार प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिक ने बताया किसानों के लिए निर्णायक कदम
आरएके कॉलेज के सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी जैन ने इस निर्णय को क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार अनुसंधान और वैज्ञानिक मार्गदर्शन किसानों के करीब उपलब्ध होने से नई तकनीकों को अपनाने में तेजी आ सकती है। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने और किसानों को वैज्ञानिक खेती की ओर ले जाने में मदद मिलेगी।
सीहोर की कृषि पहचान को मिलेगी नई उड़ान
भाऊखेड़ी में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र की स्थापना से सीहोर की कृषि पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। इछावर और आसपास के सोयाबीन उत्पादक गांवों के किसानों को इसका सबसे प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। अनुसंधान, उन्नत बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन एक ही व्यवस्था से जुड़ने पर जिले में सोयाबीन की खेती को नई दिशा मिल सकती है।
किसान वर्ष की सौगात, भविष्य की खेती की नींव
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब किसानों के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत घटाने की चुनौती भी है। भाऊखेड़ी की 20 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित केंद्र आने वाले समय में सिर्फ अनुसंधान का परिसर नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों का केंद्र बन सकता है। खेत में पसीना बहाने वाले किसान तक विज्ञान की ताकत पहुंची तो सीहोर की सोयाबीन खेती नई ऊंचाई छू सकती है। किसान वर्ष में लिया गया यह फैसला जिले की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय तक असर छोड़ने वाला कदम साबित हो सकता है।












