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भारत का सीक्रेट आइलैंड :जहां आम लोगों की एंट्री पर सख्त बैन, कदम रखना मौत को दावत देने जैसा

नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड भारत का रहस्यमयी और खतरनाक द्वीप है। यहां रहने वाली सेंटिनली जनजाति बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग है। सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से सरकार ने आम नागरिकों की एंट्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। यह द्वीप कदम रखने पर मौत को न्योता देने जैसा माना जाता है।
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जहां आम लोगों की एंट्री पर सख्त बैन, कदम रखना मौत को दावत देने जैसा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड दुनिया के सबसे रहस्यमयी और संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। यह द्वीप भारत का हिस्सा होने के बावजूद आम लोगों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। यहां बिना अनुमति जाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है।

    बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग है यह जनजाति

    इस द्वीप पर रहने वाली जनजाति को सेंटिनली कहा जाता है। यह दुनिया की उन दुर्लभ जनजातियों में से एक है, जिसने हजारों वर्षों से बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह जनजाति करीब 50,000 से 60,000 सालों से इस क्षेत्र में रह रही है। उनकी जीवनशैली आज भी बहुत सरल और पारंपरिक है, जिसमें शिकार, मछली पकड़ना और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहना शामिल है।

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    भारत सरकार ने क्यों लगा रखा है प्रतिबंध?

    भारत सरकार ने इस द्वीप पर जाने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:

    1. सुरक्षा कारण

    सेंटिनली जनजाति बाहरी लोगों के प्रति संवेदनशील और रक्षात्मक मानी जाती है। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति उनके क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो वे अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया कर सकते हैं। 2006 में दो भारतीय मछुआरे गलती से इस द्वीप के पास पहुंच गए थे, जिनकी वहां मृत्यु हो गई थी।

    2. स्वास्थ्य संबंधी खतरा

    इस जनजाति की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बाहरी दुनिया के लोगों की तुलना में बहुत कम है। ऐसे में सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे रोग भी उनके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं और पूरी जनजाति के अस्तित्व को खतरे में डाल सकते हैं। इसी कारण सरकार ने इस द्वीप के आसपास 5 समुद्री मील के दायरे में भी प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है।

    कानून और संरक्षण

    भारत सरकार और अंडमान प्रशासन इस द्वीप की सख्ती से निगरानी करते हैं। यह प्रतिबंध केवल सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि इस जनजाति की संस्कृति और अस्तित्व को सुरक्षित रखने के लिए भी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस तरह की जनजातियों को “Isolated Tribes के रूप में संरक्षित करने की नीति अपनाई जाती है, ताकि उनकी जीवनशैली में बाहरी हस्तक्षेप न हो।

    आधुनिक दुनिया से पूरी तरह दूर

    सेंटिनली जनजाति आज भी आधुनिक तकनीक और सभ्यता से पूरी तरह अलग जीवन जी रही है। उनके पास न बिजली है, न इंटरनेट, और न ही किसी आधुनिक सुविधा का उपयोग। वे प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीते हैं और बाहरी दुनिया से दूरी बनाए रखना ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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