सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में ऑपरेशन थंडर 2026 को लेकर संयुक्त कार्यशाला, वन्यजीव अपराध रोकने पर जोर

सोहागपुर। इंटरपोल की ओर से वन्यजीव और वानिकी अपराधों के साथ वन्यजीव एवं वनस्पतियों के अवैध व्यापार के खिलाफ चलाए जा रहे वैश्विक अभियान ऑपरेशन थंडर 2026 के तहत रविवार, 4 अक्टूबर को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के इको सेंटर मटकुली में अंतर-विभागीय संयुक्त कार्यशाला और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ऑपरेशन थंडर 2026 का अभियान 14 सितंबर से 14 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के पिपरिया और पचमढ़ी उपवनमंडल के साथ आसपास के तामिया और जुन्नारदेव क्षेत्रों में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। कार्यक्रम में अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों ने वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और सूचनाओं के तेजी से आदान-प्रदान को लेकर चर्चा की।
पुलिस और वन विभाग के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर
कार्यशाला में वन्यजीव और वानिकी अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस, वन, विद्युत और पंचायत विभाग के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने वन्यजीव अपराध की दृष्टि से संवेदनशील गांवों और वन क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी रखने की जरूरत बताई। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर संबंधित विभागों के बीच सूचना पहुंचने में देरी नहीं होनी चाहिए। समय पर सूचना और संयुक्त कार्रवाई को वन्यजीव अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण माना गया।
अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी पर निगरानी
कार्यशाला में अवैध शिकार, वन्यजीवों के अंगों और उत्पादों के अवैध व्यापार तथा उनके परिवहन को रोकने के लिए लगातार निगरानी की आवश्यकता बताई गई। अधिकारियों ने साइबर पेट्रोलिंग और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बढ़ाने पर भी जोर दिया। स्थानीय स्तर पर सक्रिय संदिग्ध शिकारी समूहों और वन्यजीव अपराध से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। इंटरपोल के अनुसार वन्यजीव अपराध में अवैध शिकार से लेकर परिवहन और बिक्री तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला शामिल हो सकती है और ऐसे अपराध कई बार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होते हैं।
ग्राम स्तर पर मजबूत किया जाएगा सूचना तंत्र
कार्यशाला में गांव से लेकर जिला स्तर तक संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तेजी से साझा करने के लिए प्रभावी सूचना तंत्र विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना रहा कि वन्यजीव अपराध की किसी भी सूचना पर समय रहते संबंधित विभागों को सक्रिय किया जाए तो अपराध को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। इसके लिए मैदानी अमले, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के बीच संपर्क को मजबूत करने की जरूरत बताई गई।
हाट-बाजार और बस स्टैंड पर जागरूकता अभियान
वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए हाट-बाजार, बस स्टैंड और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने की बात कही गई। स्थानीय लोगों को वन्यजीव अपराध के पर्यावरणीय और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देने तथा संदिग्ध गतिविधियों की सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
संदिग्ध गतिविधियों पर साइबर निगरानी भी जरूरी
अधिकारियों ने माना कि वन्यजीवों और उनके अंगों की अवैध खरीद-बिक्री के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में केवल जंगल और सड़क स्तर की निगरानी पर्याप्त नहीं है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी भी जरूरी है। इसी को देखते हुए साइबर पेट्रोलिंग और ऑनलाइन मॉनिटरिंग को वन्यजीव अपराध नियंत्रण की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर चर्चा की गई।
मौजूद रहे वन और पुलिस विभाग के अधिकारी
संयुक्त कार्यशाला में सहायक संचालक पचमढ़ी संजीव शर्मा, SDOP पिपरिया मोहित यादव, सहायक संचालक पिपरिया आशीष खोबरागड़े, थाना प्रभारी बनखेड़ी विजय सनस समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा देनवा बफर के परिक्षेत्र अधिकारी, पूर्व पचमढ़ी के परिक्षेत्र अधिकारी, मटकुली परिक्षेत्र के अधिकारी तथा विद्युत विभाग के सहायक उपयंत्री राजेश कुमार केवट सहित वन विभाग का मैदानी अमला भी कार्यशाला में शामिल हुआ।
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त्वरित और कानूनी कार्रवाई का संकल्प
कार्यशाला के अंत में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों ने ऑपरेशन थंडर 2026 की अवधि के दौरान आपसी समन्वय को मजबूत रखने और वन्यजीव अपराध से संबंधित मिलने वाली सूचनाओं पर त्वरित एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।




















