Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

High Court News : दुष्कर्म पीड़िता के बयानों पर भरोसा कर हाईकोर्ट ने सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार रखी

दुष्कर्म के एक मामले में हाईकोर्ट ने जिला सत्र न्यायालय के फैसले को यथावत रखते हुए सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार रखी। डिवीजन बेंच ने कहा- मेडिकल रिपोर्ट्स पीड़िता के बयानों की पुष्टि कर रहीं हैं।
दुष्कर्म पीड़िता के बयानों पर भरोसा कर हाईकोर्ट ने सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार रखी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। रिश्तों को तार-तार करने वाले एक जघन्य मामले में हाईकोर्ट ने सतना की जिला सत्र न्यायालय के फैसले को यथावत रखते हुए दुष्कर्म के आरोप में सौतेले पिता को 16 साल पहले दी गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की डिवीजन बेंच ने इस मामले में पीड़िता और उसकी बहन के बयानों पर भरोसा जताया है। बेंच ने कहा कि इन बयानों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट्स में हो रही हैं। ऐसे में आरोपी को दी गई सजा एकदम उचित है।

    पत्नी ने दर्ज कराया था पति के खिलाफ केस

    हाईकोर्ट में यह अपील सोनू उर्फ मो. हफीज की ओर से दाखिल की गई थी। उसके खिलाफ कोतवाली थाने में उसकी पत्नी ने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म की शिकायत वर्ष 2009 में दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि पहले पति के इंतकाल के बाद वह अपने चार बच्चों को लेकर आरोपी के यहां पत्नी के रूप में रहने लगी थी। इसके बाद उसने दो और बच्चों को जन्म दिया। 

    2010 में सुनाई थी उम्रकैद की सजा

    महिला का आरोप था कि 5 अक्टूबर 2009 को जब वह काम से लौटी तो उसकी बड़ी बेटी ने उसे बताया कि आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। पुलिस द्वारा पेश किए गए चालान पर विचारण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए 29 अक्टूबर 2010 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ यह अपील हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी।

    मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि

    मामले पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता बीके उपाध्याय ने दलीलें रखीं। हालांकि आरोपी की ओर से कहा गया कि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए उसके बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इस दलील को सिरे से नकारते हुए  बेंच ने कहा कि निचली अदालत में जिरह के दौरान जब आरोपी पक्ष ने सुझाव दिया कि बलात्कार किसी और (अफजल) ने किया है, तो बच्ची ने निडर होकर जवाब दिया कि अफजल ने नहीं, बल्कि मेरे पिता ने ही मेरे साथ गलत काम किया है। उसके बयान की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में हुई। इतना ही नहीं, पीड़िता की छोटी बहन ने भी गवाही दी कि आरोपी ने उसे और उसके भाइयों को कमरे से बाहर निकालकर कमरे में दरिंदगी को अंजाम दिया। इतने सबूतों को सजा के लिए काफी पाकर डिवीजन बेंच ने आरोपी की अपील खारिज कर दी। 

    People's Reporter
    By People's Reporter

    Latest Posts