रुपए को संभालने के लिए RBI उठाएगा हर जरूरी कदम, बोले गवर्नर संजय मल्होत्रा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संकेत दिए हैं कि अगर विदेशी मुद्रा बाजार में असामान्य उतार-चढ़ाव बढ़ा तो केंद्रीय बैंक पीछे नहीं हटेगा। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि रुपए को संभालने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास करीब 700 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जो किसी भी बाहरी दबाव से निपटने के लिए पर्याप्त है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला है। फरवरी के आखिर से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है। हालांकि RBI का मानना है कि मौजूदा स्तर पर रुपया जरूरत से ज्यादा दबाव में दिखाई दे रहा है और इसकी वास्तविक स्थिति इससे बेहतर है।
"किसी खास स्तर पर रुपए को रोकना मकसद नहीं"
एक इंटरव्यू में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि रिजर्व बैंक का उद्देश्य किसी तय स्तर पर रुपये को बनाए रखना नहीं है। लेकिन अगर बाजार में घबराहट, सट्टेबाजी या अव्यावहारिक दबाव बनता है तो RBI हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित गतिविधि बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। अगर जरूरत पड़ी तो RBI हर जरूरी कदम उठाएगा।
RBI के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि देश के पास विदेशी मुद्रा का मजबूत भंडार है। करीब 700 अरब डॉलर का यह रिजर्व किसी भी तरह की अनावश्यक बाजार गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि हालिया गिरावट के बाद रुपया अब "अंडरवैल्यूड" दिखाई दे रहा है। यानी मौजूदा कीमत उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शा रही। RBI के अनुसार नाममात्र आधार और REER यानी रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट दोनों पैमानों पर रुपया कमजोर स्थिति में नजर आ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो रुपये में फिर मजबूती लौट सकती है।
पश्चिम एशिया संकट का पड़ा असर
RBI गवर्नर ने माना कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रा बाजार पर साफ दिखाई दिया है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ, जबकि कई देशों की मुद्राओं पर दबाव बना। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग भी तेज हो जाती है। इसी वजह से रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि RBI का मानना है कि हालात सामान्य होने के बाद भारतीय मुद्रा फिर स्थिर हो सकती है।
चालू खाता घाटा कम करना जरूरी
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत को अपने चालू खाता घाटे यानी चालू खाता घाटा को नियंत्रित करने की दिशा में लगातार काम करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में कई कदम उठा रही है और आने वाले समय में इसका असर दिखाई दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कैपिटल अकाउंट में कुछ सुधार की जरूरत है ताकि विदेशी निवेश को और बेहतर तरीके से आकर्षित किया जा सके। मजबूत निवेश माहौल बनने से रुपये को भी सहारा मिलेगा।
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महंगाई नियंत्रण RBI की पहली प्राथमिकता
RBI गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकता महंगाई को नियंत्रण में रखना है। उन्होंने कहा कि अगर महंगाई का स्तर नीतिगत राहत देने की स्थिति में आता है, तो RBI आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले समय में ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर फैसले महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।












