'हनीमून सुइट' के बाद अब ट्रेन में 'रुद्राभिषेक'!वायरल VIDEO ने मचाया बवाल, रेलवे को देनी पड़ी सफाई

भारतीय रेलवे से जुड़े वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। कुछ समय पहले ट्रेन के एक सुहागरात कोच का वीडियो खूब चर्चा में रहा था। अब एक और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रेन के अंदर विधि-विधान से पूजा होती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कई सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई यूजर्स ने पूछा कि क्या किसी ट्रेन के कोच के अंदर इस तरह धार्मिक कार्यक्रम या पूजा करना नियमों के अनुसार सही है? क्या आम यात्री भी ऐसा कर सकते हैं? इन सवालों के बीच अब रेलवे ने पूरे मामले पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
रेलवे ने बताया- 'यह आम कोच नहीं था'
वीडियो वायरल होने के बाद नॉर्दर्न रेलवे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई जारी की।रेलवे ने बताया कि जिस कोच में पूजा की गई, वह कोई सामान्य यात्री डिब्बा नहीं था। यह एक प्राइवेट सैलून कार थी, जिसे IRCTC के माध्यम से एक निजी पार्टी ने व्यावसायिक (कमर्शियल) बुकिंग के जरिए किराये पर लिया था। रेलवे ने कहा कि यह पूरी तरह अधिकृत बुकिंग थी और सभी नियमों का पालन किया गया था।

क्या होती है सैलून कार?
रेलवे के अनुसार, सैलून कार एक विशेष प्रकार का लग्जरी रेल कोच होता है। इसे आम यात्रियों के लिए नहीं बनाया जाता। यह विशेष रूप से वरिष्ठ अधिकारियों, वीआईपी मेहमानों या निजी बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इस कोच में यात्रियों को कई आधुनिक और आरामदायक सुविधाएं मिलती हैं।
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सैलून कार में मिलती हैं ये सुविधाएं
सैलून कार किसी होटल के कमरे जैसी सुविधाओं से लैस होती है।
इसमें शामिल हैं-
- एयर कंडीशंड बेडरूम
- आरामदायक लिविंग रूम
- डाइनिंग एरिया
- छोटी रसोई (किचनेट)
- अटैच बाथरूम
- बैठने की अलग व्यवस्था
- निजी यात्रा की सुविधा
IRCTC के जरिए हुई थी बुकिंग
रेलवे ने बताया कि इस सैलून कार की बुकिंग 8 जुलाई को IRCTC के माध्यम से की गई थी। यह बुकिंग एक निजी पार्टी ने व्यावसायिक आधार पर कराई थी। इसके लिए सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गई थीं। रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह किसी नियम का उल्लंघन नहीं था।
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3 लाख रुपए से ज्यादा जमा किए गए
रेलवे के अनुसार, सैलून कार बुक कराने वाली पार्टी ने 3,08,580 रुपए का एडवांस भुगतान किया था। यह भुगतान कमर्शियल बुकिंग के तहत किया गया था। इसके बाद रेलवे ने तय प्रक्रिया के अनुसार कोच उपलब्ध कराया।
नई दिल्ली से मुंबई तक की थी यात्रा
रेलवे ने बताया कि इस सैलून कार को 10 जुलाई को ट्रेन नंबर 12926 पश्चिम एक्सप्रेस के साथ जोड़ा जाना था। यह यात्रा नई दिल्ली (NDLS) से मुंबई (बांद्रा टर्मिनस - BDTS) तक की एकतरफा यात्रा के लिए तय की गई थी। यात्रा के दौरान इसी सैलून कार के अंदर पूजा का आयोजन किया गया था।
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रेलवे ने नियमों का किया बचाव
रेलवे ने साफ कहा कि पूजा किसी सामान्य यात्री कोच में नहीं हुई थी। यह निजी रूप से बुक किया गया सैलून कोच था, इसलिए उसके अंदर निजी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। रेलवे के अनुसार इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।
सोशल मीडिया पर क्यों उठा विवाद?
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि अगर ट्रेन में पूजा हो सकती है, तो क्या दूसरे लोग भी धार्मिक कार्यक्रम कर सकते हैं? कुछ लोगों ने इसे निजी आस्था का मामला बताया, जबकि कुछ ने रेलवे के नियमों को लेकर सवाल खड़े किए।
आम यात्रियों के लिए क्या है नियम?
रेलवे की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, सामान्य यात्री कोच में इस तरह के धार्मिक या निजी कार्यक्रम की अनुमति नहीं होती। यह मामला अलग था क्योंकि पूरा सैलून कोच निजी रूप से नियमों के तहत बुक किया गया था। इसलिए इसे सामान्य यात्री कोच से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।











