RSS Path Sanchalan : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मनाया 100 वर्ष का गौरव, भोपाल में निकला भव्य पथ संचलन

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने 100 वर्ष पूर्ण होने और विजयादशमी के अवसर पर देशभर में भव्य पथ संचलन का आयोजन किया। इस अवसर पर संघ के स्वयंसेवक परंपरागत गणवेश में कदमताल करते हुए ध्वज को प्रणाम करते नजर आए। राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल रहा।
विभिन्न स्थानों से निकले पथ संचलन
भोपाल में संघ का पथ संचलन शहर के कई इलाकों से होकर गुजरा। संविदा बस्ती सहित अन्य क्षेत्रों में स्वयंसेवक अनुशासन और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए आगे बढ़ते नजर आए। नागरिकों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। स्थानीय लोगों का कहना था कि, संघ का यह आयोजन समाज में एकता और संस्कृति के प्रति जागरूकता का संदेश देता है।
संघ की धारणा और उद्देश्य पर दी गई जानकारी
पथ संचलन शुरू होने से पहले स्वयंसेवकों को संघ की मूल धारणा, नीतियों और उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी गई। संघ पदाधिकारी हरिओम ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज के उत्थान के लिए काम करना और समाज को एक सूत्र में जोड़ना है। उन्होंने कहा कि, संघ 100 वर्षों से राष्ट्र निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है और आज का दिन उसी समर्पण का प्रतीक है।
देशभर में दिखा उत्साह का माहौल
विजयादशमी और संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में उल्लास के साथ मनाया गया। जगह-जगह पथ संचलन निकाले गए, जिनमें हजारों स्वयंसेवकों ने भाग लिया। हर जगह लोगों ने फूल बरसाकर संघ के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। इस अवसर पर संघ के पदाधिकारियों ने देश की एकता, सेवा और संस्कारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
संघ की ‘पांच निष्ठाएं’ बनीं संदेश का आधार
इस विशेष अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा बताए गए ‘पांच निष्ठा’ के संदेश को भी स्वयंसेवकों तक पहुंचाया गया। यह निष्ठाएं समाज, राष्ट्र, संस्कृति, संगठन और आत्मबल के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं। संघ पदाधिकारी हरिओम ने कहा कि, संघ इन्हीं सिद्धांतों पर काम करता है और यही उसकी शक्ति का आधार है।
एकता और राष्ट्रभावना का प्रतीक आयोजन
विजयादशमी पर निकला यह पथ संचलन सिर्फ एक जुलूस नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना और एकता का प्रतीक बन गया। स्वयंसेवकों की कदमताल, ध्वज को प्रणाम और नागरिकों का स्वागत सबने मिलकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।











