वैक्सीनेटेड पेट डॉग ने ली जान...रिटायर्ड IAS अधिकारी की बेटी की रेबीज से मौत, काटने के 4 महीने बाद थम गई सांसें

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर में एक दुखद और चेतावनी भरी घटना सामने आई है। रिटायर्ड IAS अधिकारी की बेटी की रेबीज से मौत हो गई। वह एक प्रतिष्ठित स्कूल में सलाहकार के रूप में कार्यरत थीं। चार महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद उन्होंने समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण नहीं कराया, जिससे स्थिति घातक बन गई। इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि कुत्तों और अन्य जानवरों के काटने की घटनाओं को हल्के में लेना कितना खतरनाक हो सकता है।
क्या है पूरा मामला
चार महीने पहले, गांधीनगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में कार्यरत पीड़िता स्कूल परिसर में कुत्ते के साथ खेल रही थी। तभी स्कूल के एक स्टाफ के पालतू बीगल कुत्ते ने उन्हें काट लिया। जानकारी के मुताबिक, पालतू कुत्ते को सभी वैक्सीन लगी हुई थी। वहीं चोट को हल्का समझकर पीड़िता ने तुरंत एंटी-रेबीज टीकाकरण नहीं कराया गया।
अक्टूबर 2025 में कुत्ते में रेबीज के लक्षण दिखने लगे और कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद स्कूल ने बच्चों के माता-पिता और कर्मचारियों को जानकारी दी। इसके साथ ही जो लोग कुत्ते के संपर्क में आए थे, उन्हें पोस्ट-एक्सपोजर वैक्सिनेशन (Anti-Rabies Vaccine) लेने की सलाह दी। पीड़िता ने समय पर वैक्सीन नहीं लगवाई।
दिसंबर में बिगड़ी तबीयत
दिसंबर 2025 के अंत में पीड़िता की तबीयत अचानक से बिगड़ गई। 30 दिसंबर 2025 को उन्हें गांधीनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने पुष्टि कर बताया कि, उन्हें रेबीज का संक्रमण हो चुका है। रेबीज एक तीव्र वायरल संक्रमण है और लक्षण दिखने के बाद लगभग 100% घातक होता है। इस दौरान डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन 19 दिनों तक चसे इलाज के बावजूद पीड़िता की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
17 जनवरी का हुआ निधन
महिला का 17 जनवरी 2026 को निधन हो गया। प्रशासन और अस्पताल ने शव को सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत रखा। शव को गांधीनगर सेक्टर-30 श्मशान में ले जाकर इलेक्ट्रिक भट्टी में अंतिम विदाई दी गई। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि, समय पर इलाज और एंटी-रेबीज वैक्सीन की अहमियत को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है।
पीड़िता के बारे में जानें
पीड़िता ने अपनी शिक्षा St. Xavier’s College, Ahmedabad से पूरी की और इसके बाद IIM Ahmedabad से MBA किया। उन्होंने Philips, Titan और Reliance Infocomm जैसी कंपनियों में 20 से अधिक वर्षों तक नेतृत्व और प्रबंधन की भूमिका निभाई।
इसके अलावा वह स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार में सलाहकार के रूप में कार्यरत रही और HIV और TB रोकथाम जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य परियोजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
निधन तक वह गांधीनगर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में सलाहकार सदस्य के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने अहमदाबाद से गांधीनगर, सेक्टर 8 में अपने रिटायर्ड पिता के पास स्थानांतरण किया और मां के साथ स्कूल में सलाहकार के रूप में कार्यरत रहीं। उनकी छोटी बहन वर्तमान में दिल्ली में रहती हैं।
रेबीज (Hydrophobia) के बारे में जानें
- रेबीज एक तीव्र वायरल संक्रमण है और इसके लक्षण प्रकट होने पर रोग लगभग हमेशा घातक होता है।
- यह संक्रमण संक्रमित जानवरों के काटने या लार के संपर्क से फैलता है।
- प्रभावित जानवरों में कुत्ते, गाय, घोड़े, बकरी, खरगोश शामिल हैं। जंगली जानवरों में लोमड़ी, चमगादड़, जेकल, हाइना प्रमुख स्रोत हैं।
- भारत में रेबीज का सबसे आम स्रोत स्ट्रे डॉग्स हैं, हालांकि पालतू जानवरों को आमतौर पर वैक्सीनेट किया जाता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी और सावधानी
- किसी भी कुत्ते या अन्य जानवर के काटने पर तुरंत घाव की सफाई और एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना आवश्यक है।
- काटने के बाद 5-15 दिनों तक लक्षणों पर नजर रखें और किसी भी असामान्य बदलाव को गंभीरता से लें।
- स्कूल, सार्वजनिक स्थान और घर में पालतू जानवरों का टीकाकरण और सुरक्षा नियम सुनिश्चित करना जरूरी है।











