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16 दिन बाद प्रशासन को याद आया चौराहा व्यस्त है! बेटी को न्याय दिलाने बैठे पिता को पुलिस ने हटाया

रीवा में बेटी और नवजात की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे रामशरण मिश्रा को पुलिस बुधवार शाम धरना स्थल से ले गई। परिवार और कांग्रेस ने कार्रवाई का विरोध करते हुए जबरन हटाने का आरोप लगाया। प्रशासन ने कहा कि सिरमौर चौराहा व्यस्त क्षेत्र है और लंबे समय तक धरने से यातायात प्रभावित हो रहा था।
 16 दिन बाद प्रशासन को याद आया चौराहा व्यस्त है! बेटी को न्याय दिलाने बैठे पिता को पुलिस ने हटाया
बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ते पिता

रीवा। संजय गांधी अस्पताल में बेटी कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद न्याय की मांग कर रहे पिता रामशरण मिश्रा को बुधवार शाम पुलिस ने धरना स्थल से हटा दिया। रामशरण मिश्रा करीब 15 दिन से सिरमौर चौराहे पर भूख हड़ताल कर रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर कुछ देर तनाव की स्थिति बनी। परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन धरने से हटाया गया। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि चौराहा व्यस्त है और वहां लंबे समय तक प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। रामशरण की मांग जिम्मेदार लोगों पर FIR और निष्पक्ष जांच की है।

15 दिन से जारी थी भूख हड़ताल

रामशरण मिश्रा अपनी बेटी और नवजात बच्चे की मौत के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार धरने पर बैठे थे। परिवार के अनुसार, 15 दिन तक भूख हड़ताल करने से उनकी तबीयत भी बिगड़ गई थी। उनका कहना है कि मामले में विभागीय कार्रवाई तो हुई लेकिन जिन लोगों को वे मौत के लिए जिम्मेदार मानते हैं, उनके खिलाफ अब तक FIR दर्ज नहीं हुई है।

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धरना स्थल से पुलिस ले गई

बुधवार शाम पुलिस रामशरण मिश्रा को धरना स्थल से अपने साथ ले गई। कार्रवाई के बाद सिरमौर चौराहे पर कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा। परिवार और कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि रामशरण शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग को लेकर बैठे थे और उन्हें जबरन हटाया गया। प्रशासन ने इस आरोप से अलग अपना पक्ष रखा है।

प्रशासन ने यातायात का दिया हवाला

तहसीलदार शिवशंकर शुक्ला के अनुसार, सिरमौर चौराहा शहर का व्यस्त इलाका है। धरने के कारण वहां लोगों की भीड़ जमा हो रही थी, जिससे यातायात और दूसरी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही थीं। प्रशासन का कहना है कि इसी वजह से रामशरण मिश्रा को धरना स्थल से हटाया गया। प्रशासन के मुताबिक, ऐसे व्यस्त स्थान पर लंबे समय तक धरना देने की अनुमति नहीं है।

25 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुई थी कल्पना

परिजनों के मुताबिक, कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए 25 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 26 अगस्त की रात प्रसव के बाद कल्पना और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। मौत से पहले कल्पना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह परिजनों से मदद मांगती दिखाई दे रही थी।

कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया

पुलिस की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने प्रशासन पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि रामशरण मिश्रा अपनी बेटी और नवजात बच्चे को न्याय दिलाने के लिए भूख हड़ताल कर रहे थे। कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।

पहले ही हो चुकी है विभागीय कार्रवाई

मामले में चार स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। दो नर्सिंग स्टाफ के साथ ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल और डॉ. निधि पांडे को निलंबित किया गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाया गया। वहीं 7 सितंबर को मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल का रीवा से सतना मेडिकल कॉलेज तबादला किया गया। मामले की जांच के लिए भोपाल से टीम भी रीवा पहुंची थी।

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परिवार की मांग FIR की

रामशरण मिश्रा के परिवार का कहना है कि विभागीय कार्रवाई के बावजूद उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं हुई है। परिवार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिजनों का कहना है कि जब तक इस मांग पर कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

EDIT BY: ADITI RAWAT

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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