जन्माष्टमी पर कान्हा जी को लगाएं स्पेशल भोग, बिना मावा-बिना चाशनी ऐसे बनाएं मोहन पेड़ा

कहते हैं, कान्हा को माखन-मिश्री से जितना प्यार था, उतना ही प्यार उन्हें भक्तों के प्रेम से भी था। बाल गोपाल की नटखट लीलाओं में अक्सर उनके हाथों में माखन की मटकी और चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान नजर आती है। यही वजह है कि जन्माष्टमी आते ही भक्त अपने लड्डू गोपाल के लिए तरह-तरह के पकवान तैयार करने में जुट जाते हैं। अबकी बार अगर आप भी सोच रहे हैं कि कान्हा जी के भोग में क्या खास बनाया जाए, तो बाजार की महंगी मिठाई उठाने की जरूरत नहीं है। घर में रखे बेसन, घी और चीनी से ऐसा शानदार मोहन पेड़ा तैयार कीजिए कि भोग की थाली भी चमक उठे और खाने वाले भी तारीफ करते न थकें। सबसे अच्छी बात? इसमें न मावे का झंझट है, न चाशनी बनाने की टेंशन और न ही ढेर सारे सामान की जरूरत। स्वाद ऐसा कि पेड़ा मुंह में जाते ही घुलने लगेगा।
बाजार की मिठाई क्यों, इस बार घर में बनाएं भोग वाली मिठाई
त्योहारों के दिनों में मिठाइयों की मांग बढ़ते ही बाजार में मावे और मिठाइयों की शुद्धता को लेकर चिंता भी बढ़ जाती है। ऐसे में घर पर बनी मिठाई का अपना ही मजा है। आप अपनी आंखों के सामने सारी सामग्री डालकर मिठाई तैयार कर सकते हैं। यानी स्वाद भी देसी, सामग्री भी अपनी और कान्हा जी के भोग का संतोष भी अलग।
मोहन पेड़ा बनाने के लिए चाहिए ये सामान
इस रेसिपी में बहुत ज्यादा सामान जुटाने की जरूरत नहीं है। बस किचन से ये चीजें निकाल लीजिए:
- बेसन: 1 कप, अच्छी तरह छना हुआ
- देसी घी: आधा कप
- पिसी चीनी या बूरा: तीन-चौथाई कप
- गुनगुना दूध: 2 से 3 बड़े चम्मच
- इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच
- केसर: 8-10 धागे
- पिस्ता और बादाम: सजाने के लिए
अब शुरू होता है असली स्वाद का खेल...
1. बेसन को ऐसे भूनें कि खुशबू पूरे घर में फैल जाए
सबसे पहले भारी तले वाली कढ़ाई लें और उसमें आधा कप देसी घी डालकर हल्का गर्म करें। अब इसमें छना हुआ बेसन डाल दें। यहां जल्दबाजी बिल्कुल नहीं करनी है। गैस धीमी रखें और बेसन को लगातार चलाते हुए प्यार से भूनें। करीब 8-10 मिनट बाद बेसन का कच्चापन खत्म होने लगेगा। उसका रंग हल्का सुनहरा होगा और घी की खुशबू के साथ बेसन की ऐसी सौंधी महक आएगी कि आपको खुद समझ आ जाएगा—पेड़ा अब सही रास्ते पर है।
2. पेड़े को दानेदार बनाने का छोटा सा कमाल
अब आता है इस रेसिपी का मजेदार ट्विस्ट, भुने हुए बेसन में 2-3 चम्मच गुनगुना दूध हल्का-हल्का छिड़कें। दूध डालते ही बेसन में झाग बनेगा और उसका टेक्सचर दानेदार होने लगेगा। इसे 1-2 मिनट और चलाएं और फिर गैस बंद कर दें। यही छोटा सा स्टेप मोहन पेड़े को खास टेक्सचर देने में मदद करता है।
3. केसर-इलायची से आएगी भोग वाली खुशबू
अब भुने हुए बेसन में इलायची पाउडर डालें। केसर के धागों को पहले 2 चम्मच गर्म दूध में भिगोकर रखें। अब इस केसर वाले दूध को बेसन में डालकर अच्छी तरह मिला दें। पूरा मिश्रण देखकर ही मन करेगा कि अभी एक चम्मच चख लिया जाए, लेकिन जरा ठहरिए... कान्हा जी का भोग अभी बनकर तैयार नहीं हुआ है!
4. चीनी डालते समय रखें इस बात का ध्यान
अब मिश्रण को थोड़ा गुनगुना होने दें। ध्यान रखें कि बहुत गर्म बेसन में चीनी नहीं डालनी है। जब मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तभी इसमें पिसी हुई चीनी या बूरा डालें। अब हाथों से इसे अच्छी तरह मिलाएं, ताकि चीनी और बेसन एकदम अच्छे से मिल जाएं और मिश्रण पेड़े बनाने लायक हो जाए।
5. अब आएगा पेड़ा बनाने का सबसे मजेदार हिस्सा
मिश्रण का थोड़ा-थोड़ा हिस्सा हाथ में लें और गोल करके छोटी लोई बना लें। अब इसे हल्का दबाकर पेड़े का आकार दें। बीच में अंगूठे से छोटा सा गड्ढा बनाएं और उसमें पिस्ता-बादाम की कतरन लगा दें। बस! आपका देसी घी वाला नरम-नरम मोहन पेड़ा तैयार है।
कान्हा जी के भोग की थाली में सजाएं प्यार
अब इन खूबसूरत पेड़ों को भोग की थाली में सजाइए। साथ में माखन-मिश्री, फल और दूसरे पसंदीदा भोग रख सकते हैं।
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पेड़ा बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- बेसन को धीमी आंच पर ही भूनें, वरना नीचे से जल सकता है।
- बेसन को लगातार चलाते रहें ताकि वह समान रूप से भुने।
- दूध बहुत ज्यादा न डालें, वरना मिश्रण जरूरत से ज्यादा नरम हो सकता है।
- चीनी हमेशा मिश्रण के थोड़ा ठंडा होने पर डालें।
- पेड़े को ज्यादा जोर से न दबाएं, हल्के हाथों से आकार दें।
- सजावट के लिए पिस्ता और बादाम की कतरन इस्तेमाल करें।




















