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Reel Addict Children : रील के चक्कर में मालगाड़ी में बैठकर भोपाल पहुंचे बच्चे, यहां भी की रील की प्लानिंग

सोशल मीडिया पर रील बनाने के लिए कुछ बच्चे मालगाड़ी (Goods Train) में बैठकर भोपाल पहुंच गए। मोबाइल लोकेशन और नागरिकों की मदद से इन्हें ट्रेस कर परिजनों को सौंपा गया।
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रील के चक्कर में मालगाड़ी में बैठकर भोपाल पहुंचे बच्चे, यहां भी की रील की प्लानिंग

पल्लवी वाघेला, भोपाल। सोशल मीडिया की भ्रामक दुनिया में बच्चे इस कदर खो रहे हैं कि बिना खतरे की चिंता किए ऐसे कदम उठा लेते हैं, जिसे सुन बड़े-बड़े चौंक जाएं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है, जहां बीना क्षेत्र के बच्चे रील बनाने की ललक में मालगाड़ी में चढ़े और गलती से भोपाल तक आ पहुंचे। लेकिन रील का चस्का इसके बाद भी बरकरार रहा।

भोपाल में तलाश रहे थे रील बनाने की जगह

बच्चों ने भोपाल पहुंचने के बाद भी अभिभावकों से संपर्क करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उल्टा भोपाल में वो जगह सर्च की जहां की रील्स वायरल हो सकती है। हालांकि, बच्चों को देख एक नागरिक ने पुलिस को सूचना दी, वहीं, बच्चों के परिवार की जानकारी पर स्थानीय पुलिस भी उनकी लोकेशन को ट्रैक कर भोपाल पुलिस से संपर्क कर चुकी थी। इसके बाद बच्चों को रेस्क्यू कर उनके परिवार तक पहुंचाया गया।

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तीन बच्चे, उम्र 10 से 13 वर्ष

मामले में तीन बच्चों की उम्र दस से लेकर 13 वर्ष के बीच है। तीनों बच्चों को सोशल मीडिया पर वायरल होने और रील बनाने का जुनून है। बच्चे मिडिल क्लास परिवार से हैं और गर्मियों की छुट्टियों में साथ ही खेलते हैं। खेलते-खेलते रील बनाने के लिए वह मालगाड़ी में सवार हो गए और गाड़ी चलने के कारण उतर नहीं पाए। बच्चों ने कहा कि पहले वह डरे लेकिन बाद में रील्स बनाने लगे। इस बीच एक बार परिवार से कॉल भी आया, लेकिन बच्चों ने कहा कि वह लोग साथ खेल रहे हैं। परिवार ने बताया कि बच्चे कई बार खेलते-खेलते देर शाम तक घर लौटते हैं। इसके कारण परिवार ने भी काफी समय तक ध्यान नहीं दिया। वहीं, बच्चों ने कहा कि वह भोपाल उतरे और सोचा कि यहां आ पहुंचे हैं तो इस एडवेंचर का मजा पूरी तरह लेते हैं और भोपाल में रील बनाने के लिए बेस्ट जगह तलाशी।

लोकेशन और फोन ऑन-ऑफ करते रहे

यहां, बोट क्लब, वन विहार, मेट्रो ट्रेन सहित कई जगह की जानकारी मिली। इस बीच बच्चे लोकेशन और फोन ऑन-ऑफ करते रहे, लेकिन यही उन्हें ढूंढने का जरिया बनी। इस बीच एक नागरिक ने बच्चों को देखा और उसे समझ आ गया कि बच्चे बाहर से हैं। बच्चों से पूछने पर वह बहाने बनाने लगे तो नागरिक ने पुलिस को सूचना दी। परिवार भी बच्चों को लेने तब तक रवाना हो चुके थे। परिवार के सामने आने पर उन्हें समझाया गया कि लाइक्स और वायरल होने का यह शौक उनके लिए कितना खतरनाक बन सकता था। तब बच्चों ने माना कि वह आगे से ऐसी गलती नहीं करेंगे।

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पहले भी आए हैं मामले

सोशल मीडिया के चक्कर में बच्चों के घर से निकलने या खतरनाक स्टंट करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। भोपाल में ही जनवरी में एक बच्चे को रेस्क्यू किया गया था, वह सोशल मीडिया पर भोपाल के शिकारे से प्रभावित होकर रील बनाने घर से निकल आया था। इसी तरह इंदौर में रील के चक्कर में एक किशोर ने बाइक स्टंट का प्रयास किया और गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी के मुताबिक अकेले भोपाल में बीते साल करीब 225 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है, जो सोशल मीडिया और रील के प्रभाव में घर छोड़कर निकले।

ध्यान रखें अभिभावक

आजकल बच्चे इंटरनेट पर दिखने वाले स्टंट, ट्रैवल रील और “वायरल कंटेंट” से तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। कम उम्र में लाइक्स और फॉलोअर्स पाने की चाह उन्हें जोखिम भरे कदम उठाने के लिए प्रेरित कर रही है। जरूरी है कि माता-पिता बच्चों से संवाद बनाएं रखें और उन्हें समय-समय पर सोशल मीडिया के खतरे और बाहरी दुनिया की चुनौती के बारे में सचेत करते रहें।

दिव्या दुबे मिश्रा, काउंसलर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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