जबलपुर:राष्ट्रपति के हाथों मेडल पाने का सपना टूटा, मंच पर केवल 20 छात्र-छात्रा होंगे सम्मानित; 21 जून को RDVV का दीक्षांत समारोह

जबलपुर। शुरुआत में करीब 200 मेडलिस्ट और शोधार्थियों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किए जाने की उम्मीद थी। लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल और समय सीमा के चलते केवल 20 विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद छात्रों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह इस बार विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने जा रही हैं। इस आयोजन को लेकर विद्यार्थियों में लंबे समय से उत्साह बना हुआ था। गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाने की उम्मीद लगाए बैठे थे। कई विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन का यादगार क्षण मानकर तैयारियां भी शुरू कर दी थीं।
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20 छात्र-छात्राओं का हुआ चयन
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार राष्ट्रपति के कार्यक्रम की निर्धारित रूपरेखा में उपाधि और मेडल वितरण के लिए सीमित समय तय किया गया है। प्रोटोकॉल के तहत केवल पांच मिनट का समय इस प्रक्रिया के लिए उपलब्ध है। ऐसे में करीब 200 विद्यार्थियों को मंच पर बुलाना संभव नहीं है। इसी कारण प्रशासन ने केवल 20 विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें मंच पर सम्मानित करने का निर्णय लिया।
रिहर्सल में छात्रों ने जताई नाराजगी
बताया जा रहा है कि ज्यादातर विद्यार्थियों को इस बदलाव की जानकारी पहले नहीं दी गई थी। जब वे दीक्षांत समारोह की रिहर्सल में शामिल होने पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि वे राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित नहीं होंगे। यह जानकारी सामने आते ही कई छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि उन्हें पहले से स्थिति स्पष्ट कर दी जाती तो भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होती।
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चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
दीक्षांत समारोह के प्रभारी प्रो. एस.एस. संधू और प्रो. राकेश वाजपेयी ने मंच पर केवल 20 विद्यार्थियों को सम्मानित किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद छात्रों ने सवाल उठाया कि सभी स्वर्ण पदकधारी अपने-अपने विषयों में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं, फिर चयन का आधार क्या रहा। विद्यार्थियों का आरोप है कि चयन के मानदंड सार्वजनिक नहीं किए गए और न ही इसकी जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट या अन्य आधिकारिक माध्यमों पर शेयर की गई, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।












