फर्जी एससी प्रमाण पत्र केस में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा सहित तीन आरोपी बरी, कोर्ट में साबित नहीं हो सके आरोप

ग्वालियर। गुना विधानसभा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में तृतीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) देवेश उपाध्याय की अदालत ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह उर्फ मिंटू को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
वास्तविक जाति छिपाकर बनवाया था एससी सर्टिफिकेट
अभियोजन के अनुसार राजेंद्र सिंह सलूजा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि वर्ष 2008 में उन्होंने अपनी वास्तविक जाति छिपाकर स्वयं को सांसी अनुसूचित जाति का बताते हुए जाति प्रमाण पत्र हासिल किया और इसका इस्तेमाल गुना विधानसभा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के उद्देश्य से किया। मामले में किरण जैन और हरवीर सिंह उर्फ मिंटू पर भी कथित रूप से षड्यंत्र में शामिल होने तथा प्रमाणिकरण और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए थे।
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आरोपों को प्रमाणित नहीं माना
प्रकरण में राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जांच समिति की रिपोर्ट भी पेश की गई थी। समिति ने राजेंद्र सिंह सलूजा के सांसी जाति से संबंधित होने और वर्ष 1950 से मध्यप्रदेश का निवासी होने के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना था। समिति ने 8 अगस्त 2008 को जारी सांसी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर उसे राजसात करने का निर्णय लिया था। हालांकि, अदालत ने मामले में पेश किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अभियोजन के आरोपों को प्रमाणित नहीं माना। अदालत ने निष्कर्ष में राजेंद्र सिंह सलूजा को धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के आरोपों से तथा किरण जैन और हरवीर सिंह को उनके खिलाफ लगाए गए संबंधित आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपियों की ओर से प्रस्तुत बंधपत्रों को छोड़कर शेष जमानत मुचलके मुक्त किए जाएं। तीनों आरोपी मामले की सुनवाई के दौरान पहले से जमानत पर थे।
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