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देवास शराब ठेकेदार आत्महत्या केस-सस्पेंड आबकारी अधिकारी की बहाली पर रोक, निलंबन की होगी समीक्षा

इंदौर हाई कोर्ट ने निलंबित सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित को तत्काल बहाली देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि निलंबन अनिश्चित अवधि तक जारी नहीं रह सकता। सक्षम प्राधिकारी को निलंबन आदेश की समीक्षा कर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय जांच अभी लंबित है।
देवास शराब ठेकेदार आत्महत्या केस-सस्पेंड आबकारी अधिकारी की बहाली पर रोक, निलंबन की होगी समीक्षा
फाइल फोटो

इंदौर। देवास में शराब ठेकेदार की आत्महत्या के बाद कथित वीडियो में अवैध मांग के आरोपों के आधार पर निलंबित की गई सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित को हाईकोर्ट से तत्काल बहाली नहीं मिली। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन अनिश्चित अवधि तक जारी नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को निलंबन आदेश की समीक्षा कर परिस्थितियों के अनुसार उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

दिसंबर 2025 में किया गया था सस्पेंड

जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी ने मंदाकिनी दीक्षित की याचिका का निराकरण करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता को 6 दिसंबर 2025 को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी चल रही है। मामला देवास जिले में पदस्थापना के दौरान का है। उस समय मंदाकिनी दीक्षित सहायक आबकारी आयुक्त थीं। जिले के शराब ठेकेदार स्वर्गीय दिनेश मकवाना ने आत्महत्या कर ली थी। आरोप है कि आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने याचिकाकर्ता पर अवैध मांग करने का आरोप लगाया था। इसी आधार पर निलंबन किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में कहा गया कि अब मृतक के मोबाइल की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट सामने आ चुकी है।

मामला गंभीर, विभागीय जांच भी जारी

सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया। राज्य ने कहा कि एक व्यक्ति ने आत्महत्या की है और उसने याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसलिए उन्हें निलंबित करना उचित था। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है, जो अभी लंबित है। सरकार ने यह भी आपत्ति उठाई कि याचिकाकर्ता ने निलंबन आदेश के खिलाफ विभागीय अपील नहीं की, जबकि सेवा नियमों के नियम 23 के तहत यह उपाय उपलब्ध है।

जरूरत हो तो निलंबन जारी रखें

हाईकोर्ट ने कहा कि निलंबन अस्थायी और अल्प अवधि का होना चाहिए। इसलिए संबंधित अधिकारियों को निलंबन आदेश की समीक्षा करनी होगी। यदि समीक्षा के बाद सक्षम प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि निलंबन जारी रखना जरूरी है, तभी उसके संबंध में नया आदेश पारित किया जाए। कोर्ट ने इसी निर्देश के साथ मंदाकिनी दीक्षित की याचिका का निराकरण कर दिया।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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