रायसेन:किसानों को दिखाई गई खेती की नई राह, एक ही खेत से होगी फसल भी और बिजली भी
किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में रायसेन कृषि विज्ञान केंद्र में बुधवार को एग्री फोटोवोल्टिक (कृषि सौर ऊर्जा) तकनीक पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय कृषि कौशल परिषद (ASCI), गुरुग्राम के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में किसानों को ऐसी आधुनिक तकनीक से परिचित कराया गया, जिसके माध्यम से एक ही भूमि पर फसल उत्पादन के साथ-साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने इसे भविष्य की टिकाऊ और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कार्यक्रम में एएससीआई के जनरल मैनेजर एवं रीजनल हेड (ईस्ट जोन) संतोष कुमार पाण्डा, डिप्टी मैनेजर आशुतोष पाटिल, कृषि विज्ञान केंद्र रायसेन के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. स्वप्निल दुबे, वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार द्विवेदी, डॉ. मुकुल कुमार तथा रंजीत सिंह राघव सहित कई कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।
एक ही खेत से फसल और बिजली, दोनों का मिलेगा लाभ
मुख्य वक्ता संतोष कुमार पाण्डा ने बताया कि एग्री फोटोवोल्टिक ऐसी तकनीक है, जिसमें खेत में निर्धारित ऊंचाई पर सौर पैनल लगाए जाते हैं। इससे फसलों को आवश्यक धूप मिलती रहती है और साथ ही सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होता है। इस मॉडल से भूमि का बेहतर उपयोग होता है, ऊर्जा उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को एक साथ जोड़ती है, जिससे किसान खेती के साथ बिजली उत्पादन से भी नियमित आय अर्जित कर सकते हैं।
गर्मी और पाले से फसलों की सुरक्षा
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि सौर पैनलों की वजह से खेत में बेहतर सूक्ष्म जलवायु (माइक्रो क्लाइमेट) बनती है। इससे फसलों को अत्यधिक गर्मी और पाले से सुरक्षा मिलती है, जबकि सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता भी कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के तहत पालक, मैथी, चौलाई, धनिया, तुलसी, अदरक, हल्दी और प्याज जैसी कम प्रकाश वाली फसलें सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। वहीं टमाटर, ककड़ी, बैंगन, लौकी, करेला, परवल, अंगूर, गुलाब और गेंदा जैसी मध्यम प्रकाश वाली फसलें भी बेहतर उत्पादन देती हैं। इसके अलावा गेहूं, धान, अरहर, मूंग और सूरजमुखी जैसी अधिक प्रकाश वाली फसलों के लिए भी उपयुक्त मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।
100 किलोवॉट संयंत्र से रोजाना 400 यूनिट बिजली का उत्पादन
डिप्टी मैनेजर आशुतोष पाटिल ने बताया कि एग्री फोटोवोल्टिक प्रणाली में सौर पैनल, इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, नेट मीटर, बैटरी, चार्ज कंट्रोलर, एसीडीबी और डीसीडीबी जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि 100 किलोवॉट क्षमता का सौर संयंत्र लगाने के लिए लगभग 250 सौर पैनल, करीब 10 हजार वर्ग फुट भूमि तथा 35 से 40 लाख रुपए की लागत आती है। इस क्षमता का संयंत्र प्रतिदिन करीब 400 यूनिट बिजली का उत्पादन कर सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
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50 किसानों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में बनखेड़ी, चांदोनीगढ़ी, नकतरा, सोनकच्छ, गुंदरई, बाबेर सहित विभिन्न गांवों से आए करीब 50 चयनित किसानों ने भाग लिया। किसानों ने विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी हासिल की और खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन के इस मॉडल में गहरी रुचि दिखाई।
सफल आयोजन में इनका रहा विशेष योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. ब्रह्मानंद शुक्ला, आलोक कुमार सूर्यवंशी, पंकज भार्गव और सुनील केथवास का विशेष योगदान रहा।
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टिकाऊ खेती की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों ने कहा कि एग्री फोटोवोल्टिक तकनीक किसानों के लिए अतिरिक्त आय, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का प्रभावी समाधान बन सकती है। यदि इसे बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो आने वाले समय में यह खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Edited By: Sumit Shrivastava
















