Mission Falvan! राधिका आनंद ने लगाए 10 लाख से ज्यादा फलदार पेड़

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। पर्यावरणविद् और ‘प्लांटोलॉजी’ की सीईओ राधिका आनंद ने अपने ‘मिशन फलवन’ के जरिए देश में हरियाली बढ़ाने की अनोखी पहल की है। उन्होंने अब तक 10 लाख से अधिक फलदार पेड़ विभिन्न राज्यों में लगाए हैं। यह अभियान भारतीय सेना और कई सरकारी संस्थानों के सहयोग से आगे बढ़ रहा है। राधिका का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि हर जीव के लिए भोजन और जीवन का संतुलन बनाना है। यह प्रयास आज एक बड़े पर्यावरण आंदोलन का रूप ले चुका है।
कैसे हुई ‘मिशन फलवन’ की शुरुआत?
राधिका आनंद ने बताया कि इस मिशन की शुरुआत 2014 के आसपास हुई थी, जब उन्होंने अपनी कमाई का उपयोग पर्यावरण के लिए करने का फैसला लिया। उनका विचार था कि पैसा केवल व्यक्तिगत उपयोग में नहीं, बल्कि प्रकृति की सेवा में भी लगना चाहिए। शुरुआत में उन्हें कई संस्थानों और सरकारी विभागों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बाद में उनकी मुलाकात भारतीय सेना के अधिकारियों से हुई, जिन्होंने उनके विचार को समर्थन दिया और यहीं से ‘मिशन फलवन’ को असली दिशा मिली।
सेना के सहयोग से बना बड़ा अभियान
राधिका आनंद ने बताया कि भारतीय सेना ने उनके इस प्रयास को गंभीरता से लिया और सहयोग दिया। सेना के साथ मिलकर उन्होंने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में पौधारोपण किया। उनके अनुसार सेना ने इस अभियान को “ग्रीन वॉल” के रूप में देखा, जो सीमाओं और क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का काम कर रही है। इस साझेदारी ने उनके मिशन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
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फलदार पेड़ों पर खास ध्यान
‘मिशन फलवन’ में आम, इमली, जामुन और कटहल जैसे फलदार पेड़ों पर विशेष ध्यान दिया गया है। राधिका का मानना है कि हर पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देता, बल्कि कई जीवों के भोजन का भी साधन होता है। वे कहती हैं कि समाज में यह गलत धारणा है कि केवल वही पेड़ महत्वपूर्ण हैं, जिनके फल मनुष्य खाते हैं। जबकि प्रकृति में हर पेड़ किसी न किसी जीव के लिए उपयोगी होता है।
संघर्ष और शुरुआती चुनौतियां
राधिका आनंद ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुछ संस्थानों ने जमीन की कमी का हवाला दिया, तो कुछ ने संसाधनों की समस्या बताई। कई जगहों पर उन्हें यह भी कहा गया कि अकेले व्यक्ति के लिए इतना बड़ा काम करना मुश्किल है। इसके बावजूद उन्होंने अपना अभियान जारी रखा और धीरे-धीरे विभिन्न संस्थाओं का समर्थन मिलता गया।
पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत सोच बनी प्रेरणा
राधिका का मानना है कि उनकी प्रेरणा उनके परिवार से मिली। उनके दादा एक वन अधिकारी थे और पिता भी प्रकृति प्रेमी रहे हैं। बचपन से ही उन्हें पेड़ों और पर्यावरण के बीच रहने का अवसर मिला, जिसने उनकी सोच को मजबूत बनाया। वे कहती हैं कि परिवार से मिली यही सीख उनके जीवन का आधार बनी और आज यह एक बड़े आंदोलन में बदल गई।
ग्रीन एंबेसडर के रूप में बढ़ा प्रभाव
उनके कार्यों को देखते हुए उन्हें कई सुरक्षा बलों और संस्थानों का ग्रीन एंबेसडर भी बनाया गया। NSG, CISF और BSF जैसे संगठनों ने भी उनके साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम किया। इससे उनका अभियान केवल एक सामाजिक पहल न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक बड़ा प्रयास बन गया।
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पर्यावरण संदेश और सरल सलाह
राधिका आनंद का कहना है कि पर्यावरण बचाने के लिए सबसे जरूरी कदम सिंगल यूज प्लास्टिक को छोड़ना है। उनके अनुसार छोटे बदलाव ही बड़े परिणाम लाते हैं और हर व्यक्ति को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो देश का पर्यावरण संतुलन काफी बेहतर हो सकता है।











