करैरा में SDM के तबादले पर जनता का विरोध :सड़क पर उतरे लोग; ट्रांसफर रद्द करने की मांग की

पीपुल्स संवाददाता, शिवपुरी। जिले की करैरा तहसील में पदस्थ एसडीएम अनुराग निंगवाल के तबादले को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली। शनिवार को बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक सड़क पर उतर आए और तबादले आदेश का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने करैरा तहसील कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और प्रशासन से मामले में पुनर्विचार करने की अपील की।
जनता बोली- समस्याओं का होता था तत्काल समाधान
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अनुराग निंगवाल के कार्यकाल में आम लोगों की समस्याओं का तेजी से निराकरण हो रहा था। उनका व्यवहार जनसामान्य के प्रति सकारात्मक था और वे लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनते थे। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि एसडीएम ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। इसी कारण वे क्षेत्र के लोगों के बीच लोकप्रिय बने।
भू-माफियाओं और अवैध गतिविधियों के खिलाफ की सख्त कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि अनुराग निंगवाल ने भू-माफियाओं, अवैध उत्खनन और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। उनके नेतृत्व में प्रशासन ने कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई कर कानून व्यवस्था को मजबूत किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन कार्रवाइयों से आम जनता का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा और लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी। ऐसे अधिकारी का अचानक तबादला लोगों को समझ नहीं आ रहा है।
यह भी पढ़ें: जबलपुर में दर्दनाक सड़क हादसा: स्कॉर्पियो में लगी भीषण आग, दो लोगों की जलकर मौत; निकलने का नहीं मिला मौका
विधायक के खिलाफ भी लगे नारे
प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गरमा गया जब कुछ लोगों ने करैरा विधायक रमेश खटीक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने विधायक मुर्दाबाद के नारे लगाए और आरोप लगाया कि यह तबादला जनता की इच्छा के विपरीत किया गया है।
हालांकि इस पूरे मामले में विधायक रमेश खटीक की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन भी फिलहाल इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहा है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एसडीएम अनुराग निंगवाल का तबादला बिना किसी ठोस कारण के किया गया है, जिससे क्षेत्र की जनता आहत है। उन्होंने मांग की कि स्थानांतरण आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके लिए जनसभाएं, धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक माध्यम अपनाए जा सकते हैं।
प्रशासन के फैसले पर उठ रहे सवाल
करैरा में एसडीएम के तबादले को लेकर शुरू हुआ विरोध अब राजनीतिक रंग भी लेता दिखाई दे रहा है। जनता का एक वर्ग इसे जनहित के खिलाफ फैसला बता रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक तबादले के कारणों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।











