मप्र की राज्यमंत्री को राहत : जांच समिति ने माना प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाणपत्र वैध, कांग्रेस की शिकायत खारिज

मध्य प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित हाई लेवल जाति जांच समिति ने उनके अनुसूचित जाति (बागरी) प्रमाणपत्र को वैध घोषित करते हुए शिकायत खारिज कर दी। समिति ने 1950 से अब तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक और निर्वाचन रिकॉर्ड की जांच में परिवार की जाति 'बागरी' पाई, जबकि शिकायतकर्ता कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण प्रस
 जांच समिति ने माना प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाणपत्र वैध, कांग्रेस  की शिकायत खारिज
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी और शिकायतकर्ता कांग्रेस एससी विभाग अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार

जबलपुर/सतना। मध्य प्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित हाई लेवल जाति जांच समिति ने विस्तृत छानबीन के बाद उनके अनुसूचित जाति (बागरी) प्रमाणपत्र को पूरी तरह वैध माना है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में कहीं भी उनके परिवार के राजपूत होने का प्रमाण नहीं मिला है।

1950 के रिकॉर्ड अहम साक्ष्य

जांच के दौरान 1950 से लेकर वर्तमान तक के राजस्व अभिलेख, वंशावली, शैक्षणिक रिकॉर्ड और निर्वाचन दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया गया। समिति के अनुसार, आजादी के बाद के शुरूआती (1950 के दशक के) राजस्व रिकॉर्ड सबसे अहम साक्ष्य बने, जिनमें परिवार की जाति 'बागरी' दर्ज है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई भी ठोस दस्तावेजी या राजस्व प्रमाण पेश करने में पूरी तरह विफल रहे। केवल मौखिक दावों को अपर्याप्त मानते हुए समिति ने शिकायत को खारिज कर दिया और प्रमाणपत्र को निरस्त करने का कोई आधार नहीं पाया।  

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मंत्री प्रतिमा बागरी का मजबूत तर्क-राजपूत से रोटी-बेटी का संबंध नहीं

मंत्री प्रतिमा बागरी ने शिकायतों को राजनीतिक बताते हुए कहा था कि कांग्रेस अनुसूचित जाति वर्ग की एक महिला के मंत्री बनने को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने  अपने समर्थन में अनुसूचित जाति से जुड़े 110 साल पुराने रिकॉर्ड और खसरा-खतौनी के दस्तावेज पेश किए। राज्यमंत्री बागरी ने कहा कि वर्ष 1950 में मध्य प्रदेश राज्य का गठन ही नहीं हुआ था,  इसलिए उस समय की अधिसूचना के आधार पर जाति का सवाल उठाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राजपूत से रोटी- बेटी का संबंध नहीं है।

क्या था विवाद

यह पूरा विवाद प्रतिमा बागरी के कास्ट सर्टिफिकेट को लेकर है और उन्होंने अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र के आधार पर सतना जिले की आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में नगरीय विकास राज्यमंत्री बनाया गया। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने शिकायत में कहा था कि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र अवैध है।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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