भोपाल में मिक्स लैंड यूज की मांग तेज:व्यापारियों ने सांसद को सौंपा ज्ञापन, BHEL की जमीन के आवंटन पर आंदोलन की चेतावनी

भोपाल के 10 नंबर मार्केट और अरेरा कॉलोनी क्षेत्र के व्यापारियों ने मिक्स लैंड यूज लागू करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। गुरुवार को 10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद आलोक शर्मा को ज्ञापन सौंपकर नए मास्टर प्लान में आवश्यक संशोधन कराने और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। वहीं दूसरी ओर भेल (BHEL) की जमीन के संभावित आवंटन को लेकर भी विवाद गहरा गया है। श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी कर किसी अन्य संस्था को जमीन आवंटित की गई तो आंदोलन किया जाएगा।
मास्टर प्लान लागू नहीं होने से बढ़ी व्यापारियों की परेशानी
व्यापारी महासंघ ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2005 के बाद से भोपाल विकास योजना का नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका है। इसके कारण शहर में नए व्यावसायिक भूखंड विकसित नहीं हुए और व्यापारियों को मजबूरी में आवासीय भवनों से ही व्यापार संचालित करना पड़ रहा है। महासंघ का कहना है कि वर्षों से हजारों व्यापारी इसी व्यवस्था के तहत कारोबार कर रहे हैं लेकिन अब आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के नोटिस मिलने लगे हैं जिससे व्यापार और रोजगार दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
कमर्शियल टैक्स और लाइसेंस देने के बावजूद नोटिस
महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि क्षेत्र के व्यापारी नियमित रूप से नगर निगम को कमर्शियल टैक्स, मध्य प्रदेश बिजली वितरण कंपनी को व्यावसायिक दरों पर बिजली बिल और नगर निगम से प्राप्त कमर्शियल लाइसेंस का शुल्क जमा करते हैं। इसके बावजूद सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन का हवाला देकर आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद करने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और सरकार के राजस्व पर भी असर पड़ेगा।
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मिक्स लैंड यूज लागू करने की मांग
ज्ञापन में सांसद आलोक शर्मा से मांग की गई कि 10 नंबर मार्केट और अरेरा कॉलोनी के मुख्य मार्ग क्षेत्र को मिक्स लैंड यूज घोषित किया जाए। साथ ही नए मास्टर प्लान में आवश्यक संशोधन कर व्यापारियों को राहत दी जाए ताकि लंबे समय से चल रहे व्यवसायों को कानूनी मान्यता मिल सके। व्यापारियों का कहना है कि इससे व्यापार, रोजगार और सरकारी राजस्व तीनों को लाभ होगा।
भेल की जमीन को लेकर भी बढ़ा विवाद
इधर भेल की जमीन को लेकर भी नया विवाद सामने आया है। श्रमिक नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को केवल सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई थी, किसी अन्य निर्माण या आवंटन के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि भेल की जमीन पर पहला अधिकार यहां कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों का है। यदि इस भूमि का किसी अन्य उद्देश्य से आवंटन किया गया तो कर्मचारी आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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प्रबंधन भी जता चुका है आपत्ति
गौरतलब है कि इस मुद्दे पर भेल प्रबंधन भी पहले ही NHAI को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में अब व्यापारियों की मिक्स लैंड यूज की मांग और भेल भूमि विवाद दोनों ही शहर के प्रमुख प्रशासनिक और विकास संबंधी मुद्दे बन गए हैं।












