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SIR में वोटर लिस्ट से कटा प्रकाश राज का नाम? बोले- पता नहीं क्या-क्या कागज दिखाने पड़ेंगे

अभिनेता प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की वोटर लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वोटर आईडी वापस पाने के लिए अब उन्हें कौन-कौन से दस्तावेज दिखाने पड़ेंगे। इससे पहले भी प्रकाश राज वोटर आईडी से जुड़े एक मामले को लेकर चर्चा में रहे हैं।
SIR में वोटर लिस्ट से कटा प्रकाश राज का नाम? बोले- पता नहीं क्या-क्या कागज दिखाने पड़ेंगे
जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज का नाम SIR की वोटर लिस्ट से कटने की खबर सामने आई है।

नई दिल्ली। साउथ फिल्मों के जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज ने दावा किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के दौरान उनका नाम बेंगलुरु की वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वह बेंगलुरु में पैदा हुए, यहीं पढ़े और अब उनसे वोट देने का अधिकार छीन लिया गया है। प्रकाश राज ने इस कार्रवाई को लेकर तंज कसते हुए कहा कि यह एक अच्छा जोक है और इसे जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देखता हूं अपना वोटर आईडी वापस पाने के लिए क्या क्या कागजात दिखाने पड़ेंगे। अभिनेता ने अपने पोस्ट में सत्ता और अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी ताकत दिखाने के लिए उनका वोट करने का अधिकार रोक सकते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या वे उन्हें रोक पाएंगे?

प्रकाश राज ने वीडियो शेयर कर क्या कहा?

प्रकाश राज ने X पर वीडियो शेयर करते हुए वोटर लिस्ट में अपने नाम से जुड़ी जानकारी सामने रखी। उनका दावा है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि वह बेंगलुरु में पैदा हुए हैं और उन्होंने इसी शहर में पढ़ाई की है। ऐसे में वोटर लिस्ट से नाम हटने की प्रक्रिया पर उन्होंने सवाल उठाया। अभिनेता ने व्यंग्य के अंदाज में कहा कि अगर उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया गया है तो अब वह यह देखने के लिए तैयार हैं कि उसे वापस पाने के लिए उनसे कितने और कौन-कौन से कागजात मांगे जाएंगे। उनके बयान में चुनावी प्रक्रिया और नागरिक के वोट देने के अधिकार को लेकर नाराजगी साफ नजर आई। हालांकि, वोटर लिस्ट में उनका नाम किस वजह से हटाया गया, इसकी आधिकारिक वजह इस दावे के साथ सामने नहीं आई है।

क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका इस्तेमाल?

SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची को दोबारा जांचने और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में योग्य मतदाताओं के नाम मौजूद रहें और गलत, डुप्लीकेट या अपात्र नामों को हटाया जा सके। इस प्रक्रिया में मतदाताओं से पहचान और पात्रता से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इसी वजह से SIR के दौरान किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं मिलने पर उसे अपनी पात्रता साबित करने की जरूरत पड़ सकती है। प्रकाश राज का मामला भी इसी प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, उनके नाम को लेकर अंतिम स्थिति क्या है और निर्वाचन अधिकारियों की ओर से इस संबंध में क्या कारण बताया गया है, यह आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही साफ होगा।

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पहले भी वोटर आईडी को लेकर विवाद में आए थे प्रकाश राज

प्रकाश राज का नाम इससे पहले भी मतदाता पहचान पत्र से जुड़े एक मामले में सामने आ चुका है। जून 2026 में बेंगलुरु की एक अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। यह मामला 2019 में वकील दिलीप कुमार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा बताया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रकाश राज के पास एक से ज्यादा राज्यों के मतदाता पहचान पत्र हैं। शिकायत में कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना समेत चार राज्यों के वोटर आईडी होने का दावा किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक से ज्यादा जगह मतदाता पहचान पत्र रखना चुनावी नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और इन्हें अदालत द्वारा दोष साबित किए जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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शिकायत के बाद मामला कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

शिकायतकर्ता दिलीप कुमार के मुताबिक, उन्होंने 2019 में हलासुरु गेट पुलिस स्टेशन में प्रकाश राज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि शिकायत पर पुलिस की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर और चुनाव आयोग से भी संपर्क किया। जब उन्हें वहां से अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली तो उन्होंने अदालत का रुख किया। अदालत की ओर से प्रकाश राज को पेश होने के लिए समन जारी किए गए थे। शिकायत से जुड़े विवरण के मुताबिक, वह अदालत के सामने पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। हालांकि, वोटर आईडी से जुड़ा यह पुराना मामला और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने का मौजूदा दावा दो अलग-अलग घटनाएं हैं। दोनों को एक ही कार्रवाई मानना सही नहीं होगा।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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