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सकारात्मक स्टोरी :परंपरागत खेती छोड़ फल-फूल और सब्जियां उगा रहे किसान, लोगों को भी दे रहे रोजगार

इतना ही नहीं भोपाल जिले में आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी समेत अन्य प्रजातियों के फूलों की भी खेती हो रही है, जिनकी सप्लाई प्रदेश ही नहीं देश के अन्य प्रदेशों में हो रही है।
परंपरागत खेती छोड़ फल-फूल और सब्जियां उगा रहे किसान, लोगों को भी दे रहे रोजगार
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ब्रजेंद्र वर्मा, भोपाल।एक वो समय था, जब भोपाल जिले के किसान खेतों में सोयाबीन, गेहूं, चना, मूंग, मक्का की परंपरागत खेती तक सीमित हुआ करते थे। अब वो समय चल रहा है कि परंपरागत खेती को छोड़ किसान सब्जियां, फल व फूलों की खेती अधिक बढ़ावा दे रहे हैं। जिले के कई किसान ड्रैगन फ्रूट, अमरूद, आम, संतरे, मौसंबी का उत्पादन कर रहे तो कई गोभी, ब्रोकली, टमाटर, चुकंदर, गाजर, ककड़ी, खीरा, बैंगन, भिंडी, गिलकी, लौकी सहित अन्य तरह की स​ब्जियां अधिक मात्रा उगा रहे हैं।

    इतना ही नहीं भोपाल जिले में आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी समेत अन्य प्रजातियों के फूलों की भी खेती हो रही है, जिनकी सप्लाई प्रदेश ही नहीं देश के अन्य प्रदेशों में हो रही है। भोपाल के किसान सब्जी,फल व फूलों के उत्पादन में आत्म निर्भर बनता जा रहा है। राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर खेती में नई तकनीकी का उपयोग करके किसान स्वरोजगार से जुड़ रहे हैं। साथ ही जरूरतमंदों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

    -पहले खेतों में होता था सोयाबीन का उत्पादन, अब अमरूदों की बंपर आवक

    केंद्र सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना से जुड़कर बरखेड़ा बरामद के किसान अभिषेक दांगी 3 साल पहले 4 एकड़ जमीन में अमरूद के पौधे लगाए। अब पौधे पेड़ बन चुके हैं। इससे 1660 अमरूदों से 6400 किलो अमरूदों का उत्पादन हो रहा है। एक सीजन में 10 लाख रुपए का लाभ कमा रहे हैं। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई, तकनीकी व अन्य सुविधाओं का लाभ लेकर किसानों ने अमरूदों की खेती की ओर रुख किया है। इन अमरूदों की मप्र सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में अच्छी मांग है। अमरूद की खेती से किसान मनमोहन पाटीदार, अरुण दांगी सहित अन्य किसान हैं, जिन्होंने खेती को लाभ का सौदा बनाया है। उद्यानिकी के सहायक संचालक राजकुमार सगर बताते हैं कि 5 सालों में अमरूदों का रकबा 70 प्रतिशत तक बढ़ा है। 50 ग्राम पंचायतों के किसान अमरूदों का उत्पादन कर रहे हैं। बीएनआर किस्म के अमरूदों का उत्पादन तेजी से भोपाल जिले में बढ़ रहा है।

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    -कभी सोयाबीन-गेहूं की फसल तक सीमित थे, अब सब्जियां उगा रहे किसान

    भोपाल जिले में सब्जियों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। आज इतनी आवक हो रही है कि करोंद, हमीदिया रोड सहित हाट बाजारों में पर्याप्त मात्रा में स्थानीय सब्जियां आ रही हैं। जिले के फंदा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लांबाखेड़ा के किसान किशन मौर्य बताते हैं कि पारंपरिक खेती लगभग छोड़ दी है, क्योंकि इनमें अधिक कमाई नहीं है। अब पॉलीहाउस और वैज्ञानिक खेती के जरिए सब्जियां उगा रहा हूं। उद्यानिकी विभाग की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना का लाभ लेकर 4 हजार वर्गमीटर पॉलीहाउस में आधुनिक तकनीक से खेती शुरू की। अब खेतों में सोयाबीन व गेहूं की जगह ब्रोकोली, लाल गोभी, चीनी गोभी, रोमिन सलाद, लोलो रोसो, लेट्यूस, तुलसी, अजमोद, रॉकेट, रोसमेरी, थाइम, चेरी टमाटर लग रहे हैं। 25 हजार पौधों में सब्जियां लग रही हैं। विशेषज्ञों की मदद से ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाई। इससें शासन से 50 प्रतिशत सब्सिडी भी मिली। सब्जियों के अलावा गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी सहित अन्य प्रजातियों के फूलों की खेती भी करा रहा हूं। इससे हर दिन 6 से 7 हजार की आय हो रही है। साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। मौर्य के अलावा जिले के कई ऐसे किसान है, जो अपने खेतों में सब्जियां व फूलों का उत्पादन कर रहे हैं।

    100 से अधिक महिलाएं प्राकृतिक खेती जुड़कर बनीं आत्मनिर्भर

    भोपाल जिले के तीन गांव कोलूखेड़ी, सेमरीकलां एवं नलखेड़ा में लगभग 100 महिलाएं प्राकृतिक खेती कर रही हैं। इसमें 30 दीदियां लखपति हैं। इन्हीं दीदियों में से ग्राम पंचायत कोलूखेड़ी की प्रगतिशील सिंगल मदर किसान विनीता प्रजापति ने अपने गांव के घर में 5 वर्ष पहले किचन गार्डन से प्राकृतिक सब्जियां उगाना शुरू किया। इसके साथ एनआरएलएम के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आजीविका शुरू की। साल-2023 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन तिरूपति में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेकर जिले की प्राकृतिक खेती मास्टर ट्रेनर बन गई हैं। अब प्रजापति बैरसिया ब्लॉक में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग दे रही हैं। स्वयं भी अब 2 एकड़ में जैविक सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं। प्राकृतिक जैविक हाट बाजार में सब्जियों की बिक्री से उन्हें लगभग 10 हजार रुपए हर महीने लाभ अर्जित कर रही हैं।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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