Ear Infection :कान में दर्द, भनभनाहट या पस? तुरंत हो जाएं सतर्क, हो सकता है खतरनाक संक्रमण का संकेत!

अक्सर लोग सोचते हैं कि कान का काम सिर्फ सुनना होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। कान हमारे शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कान में किसी तरह की समस्या होने पर सुनने के साथ-साथ चलने-फिरने में भी परेशानी हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ईयरफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल कानों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा रहा है। कान में संक्रमण आज एक आम समस्या बन चुकी है। समय पर इसके लक्षणों को पहचान लेना जरूरी है, ताकि संक्रमण गंभीर रूप न ले सके।
लगातार कान में दर्द होना
कान में दर्द संक्रमण का सबसे सामान्य संकेत माना जाता है। यह दर्द हल्का भी हो सकता है और तेज चुभन जैसा भी महसूस हो सकता है। संक्रमण बढ़ने पर कान के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे दबाव बढ़ता है और दर्द अधिक महसूस होता है। अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे या लगातार बढ़ता जाए तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
सुनाई कम देना या कान बंद महसूस होना
संक्रमण के दौरान मध्य कान में तरल जमा हो सकता है, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। कई लोगों को ऐसा लगता है जैसे कान में पानी भर गया हो या कान बंद हो गया हो। यह भी कान में संक्रमण का एक प्रमुख संकेत हो सकता है।
कान दर्द के साथ बुखार आना
बैक्टीरिया या वायरस के कारण होने वाले संक्रमण में बुखार भी आ सकता है। खासकर बच्चों में कान के संक्रमण के साथ 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक तापमान देखा जा सकता है। हालांकि हर मामले में बुखार नहीं आता, लेकिन कान दर्द के साथ बुखार होना संक्रमण की संभावना बढ़ा देता है।
कान से पस या तरल पदार्थ निकलना
अगर कान से पीले, सफेद या बदबूदार तरल पदार्थ का रिसाव हो रहा है, तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है। कई बार कान का पर्दा प्रभावित होने पर भी तरल बाहर आने लगता है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ताकि सही इलाज शुरू किया जा सके।
कान में भनभनाहट या सीटी जैसी आवाज
कुछ लोगों को संक्रमण के दौरान कान में घंटी, सीटी या भनभनाहट जैसी आवाजें सुनाई दे सकती हैं। इस स्थिति को टिनिटस कहा जाता है। यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चों में दिख सकते हैं ये संकेत
छोटे बच्चे अपने लक्षण ठीक से बता नहीं पाते। यदि बच्चा बार-बार रो रहा हो, सो नहीं पा रहा हो या बार-बार अपने कान को छू रहा हो, तो यह कान के संक्रमण का संकेत हो सकता है। लेटने पर दर्द बढ़ने के कारण बच्चे अधिक परेशान दिखाई दे सकते हैं।
जुकाम के बाद बढ़ सकता है खतरा
कई बार कान का संक्रमण सर्दी-जुकाम या श्वसन संक्रमण के बाद विकसित होता है। यदि जुकाम के बाद कान में दर्द, बुखार या सुनने में कमी जैसी समस्याएं शुरू हो जाएं, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
समय पर इलाज है जरूरी
कान के संक्रमण को हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है। शुरुआती लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना और सही उपचार लेना जरूरी है। इससे संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है और कानों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।











