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ड्राइविंग के दौरान फोन छूने की जरूरत नहीं !कुछ मिनट में कार में सेट करें Android Auto, सफर होगा आसान

एंड्रॉयड ऑटो की मदद से ड्राइविंग के दौरान फोन इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। कॉलिंग, नेविगेशन, म्यूजिक और मैसेजिंग जैसी सुविधाएं सीधे कार की स्क्रीन पर मिल जाती हैं। जानिए एंड्रॉयड ऑटो को कार में सेट करने का आसान तरीका, जरूरी शर्तें और कनेक्टिविटी से जुड़ी अहम जानकारी।
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कुछ मिनट में कार में सेट करें Android Auto, सफर होगा आसान

आज के समय में जयादातर लोग सफर के दौरान नेविगेशन के लिए गूगल मैप्स, मनोरंजन के लिए म्यूजिक ऐप्स और बातचीत के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन गाड़ी चलाते समय बार-बार मोबाइल स्क्रीन पर नजर डालना सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी कंपनियां ऐसे फीचर्स विकसित कर रही हैं, जो ड्राइविंग को सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकें। इन्हीं सुविधाओं में से एक है एंड्रॉयड ऑटो । यह फीचर आपके स्मार्टफोन और कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ देता है। इसके बाद मोबाइल की कई जरूरी सेवाएं सीधे कार की स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती हैं। इससे ड्राइवर का ध्यान सड़क पर बना रहता है और फोन को बार-बार हाथ में लेने की जरूरत नहीं पड़ती।

आखिर क्या है एंड्रॉयड ऑटो ?

एंड्रॉयड ऑटो गूगल का एक स्मार्ट प्लेटफॉर्म है, जिसे खासतौर पर वाहनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह आपके एंड्रॉयड स्मार्टफोन को कार की स्क्रीन से जोड़कर उसे एक स्मार्ट कंट्रोल सेंटर में बदल देता है। एक बार कनेक्ट होने के बाद ड्राइवर कार की स्क्रीन से ही गूगल मैप्स पर रास्ता देख सकता है, कॉल रिसीव कर सकता है, म्यूजिक चला सकता है और वॉयस कमांड के जरिए कई काम कर सकता है। इसके अलावा व्हाट्सऐप और एसएमएस जैसे मैसेज भी बिना फोन उठाए पढ़े या सुने जा सकते हैं।

एंड्रॉयड ऑटो चलाने के लिए क्या जरूरी है?

इस सुविधा का उपयोग करने के लिए कुछ बुनियादी शर्तों का पूरा होना जरूरी है। सबसे पहले आपके पास ऐसा स्मार्टफोन होना चाहिए जिसमें एंड्रॉयड ऑटो या उससे ऊपर का ऑपरेटिंग सिस्टम मौजूद हो। इसके अलावा आपकी कार का इंफोटेनमेंट सिस्टम एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट करता हो। आजकल ज्यादातर नई कारों में यह सुविधा पहले से मिलती है, लेकिन पुराने मॉडलों में इसकी उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है। मोबाइल में इंटरनेट कनेक्शन सक्रिय होना भी जरूरी है क्योंकि नेविगेशन, ऑनलाइन म्यूजिक और अन्य कई सेवाएं डेटा पर आधारित होती हैं। यदि आपकी कार वायरलेस एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट नहीं करती तो एक अच्छी गुणवत्ता वाली USB केबल की भी जरूरत पड़ेगी।

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कार में एंड्रॉयड ऑटो सेट करना बेहद आसान

एंड्रॉयड ऑटो को पहली बार सेट करने में आमतौर पर कुछ मिनट ही लगते हैं। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके फोन में एंड्रॉयड ऑटो का लेटेस्ट वर्जन मौजूद है। इसके बाद कार स्टार्ट करें और इंफोटेनमेंट स्क्रीन को चालू होने दें। अब मोबाइल का ब्लूटूथ और वाई-फाई ऑन करें। यदि आपकी कार वायरलेस सपोर्ट नहीं करती है तो फोन को USB केबल के जरिए कार से कनेक्ट करें। कनेक्शन बनने के बाद मोबाइल स्क्रीन पर कुछ परमिशन दिखाई देंगी।

इन परमिशन को स्वीकार करना जरूरी होता है क्योंकि इन्हीं के जरिए एंड्रॉयड ऑटो को कॉल, मैसेज, लोकेशन और अन्य जरूरी फीचर्स का एक्सेस मिलता है। नियम और शर्तों को स्वीकार करने के बाद कुछ ही सेकंड में एंड्रॉयड ऑटो कार की स्क्रीन पर सक्रिय हो जाएगा। इसके बाद स्क्रीन पर मैप्स, कॉलिंग, म्यूजिक और अन्य सपोर्टेड ऐप्स दिखाई देने लगेंगे।

कनेक्ट न हो तो घबराने की जरूरत नहीं

कई बार तकनीकी कारणों से एंड्रॉयड ऑटो तुरंत कनेक्ट नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि आपकी कार वास्तव में एंड्रॉयड ऑटो को सपोर्ट करती है या नहीं। अगर सिस्टम सपोर्ट करता है तो मोबाइल और कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम दोनों को रीस्टार्ट करके दोबारा कनेक्ट करने की कोशिश करें।

कई बार पुराना सॉफ्टवेयर भी समस्या का कारण बन जाता है, इसलिए एंड्रॉयड ऑटो ऐप को अपडेट रखना जरूरी है। USB के जरिए कनेक्शन बनाने पर खराब या लो-क्वालिटी केबल भी परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में दूसरी केबल का इस्तेमाल करके देखा जा सकता है। यदि वायरलेस कनेक्शन में समस्या आ रही हो तो ब्लूटूथ और वाई-फाई को बंद करके फिर से चालू करना मददगार साबित हो सकता है। कुछ मामलों में फोन की सेटिंग्स में जाकर एंड्रॉयड ऑटो ऐप का कैश डेटा साफ करने से भी समस्या दूर हो जाती है।

सफर को स्मार्ट और सुरक्षित बनाता है यह फीचर

एंड्रॉयड ऑटो का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ड्राइवर का ध्यान सड़क से नहीं भटकता। गूगल मैप्स के जरिए रियल-टाइम नेविगेशन मिलता है, जिससे रास्ता खोजने में आसानी होती है। वहीं स्पॉटिफाई, यूट्यूब म्यूजिक और अन्य ऑडियो ऐप्स के जरिए सफर को मनोरंजक बनाया जा सकता है। इसके अलावा हैंड्स-फ्री कॉलिंग की सुविधा ड्राइविंग के दौरान बातचीत को सुरक्षित बनाती है। गूगल असिस्टेंट के जरिए केवल आवाज देकर कॉल करना, गाना बदलना, मैसेज भेजना या रास्ता खोजना संभव हो जाता है।

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नई कारों में तेजी से बढ़ रहा है इस्तेमाल

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसी वजह से एंड्रॉयड ऑटो और एंड्रॉयड ऑटो जैसे फीचर्स अब अधिकांश नई कारों में स्टैंडर्ड या वैकल्पिक रूप से दिए जा रहे हैं। अगर आपकी कार एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट करती है और आपने अभी तक इसे इस्तेमाल नहीं किया है, तो यह फीचर आपकी ड्राइविंग को पहले से ज्यादा आसान, सुरक्षित और स्मार्ट बना सकता है। कुछ मिनट की सेटिंग के बाद आपका पूरा डिजिटल अनुभव सीधे कार की स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाता है, जिससे सफर ज्यादा आरामदायक और तकनीकी रूप से उन्नत बन जाता है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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