PM Shri School:हिजाब-टोपी विवाद में फंसा स्कूल, धार्मिक गतिविधियों के आरोप, 3 शिक्षक निलंबित, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश। संभल जिले के जालम सराय स्थित पीएमश्री स्कूल में सामने आए एक मामले ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद आरोप लगा कि स्कूल में बच्चों को टोपी पहनाई गई और छात्राओं को हिजाब में प्रार्थना करवाई गई। इसके बाद प्रशासन ने तुरंत जांच करवाई और खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित एक सरकारी स्कूल से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था में हलचल मचा दी है। मामला जालम सराय गांव के पीएमश्री विद्यालय का है, जहां कुछ शिक्षकों पर स्कूल के अंदर धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला सामने आया, जिसमें दावा किया गया कि स्कूल में छात्रों को टोपी पहनाई गई और छात्राओं को हिजाब पहनाकर प्रार्थना में शामिल किया गया। वीडियो सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया और जांच शुरू कर दी गई।
जांच में सामने आई शुरुआती रिपोर्ट
वीडियो वायरल होने के बाद 8 मई को खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) स्कूल में जांच के लिए पहुंचे। जांच के दौरान स्कूल में केवल प्रभारी प्रधानाध्यापक मौजूद थे, जबकि अन्य शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। बताया गया कि प्रधानाध्यापक मेडिकल लीव पर थे। स्कूल में कुल 352 छात्र छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें अलग अलग समुदाय के बच्चे शामिल हैं। जांच के दौरान बच्चों से बातचीत भी की गई। कई छात्रों ने बताया कि वीडियो पुराना हो सकता है और उस समय की गतिविधियां अब लागू नहीं हैं। कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि टोपी या हिजाब पहनाने के लिए किसी शिक्षक ने सीधे तौर पर मजबूर नहीं किया था बल्कि कुछ बच्चों ने खुद ही ऐसा किया था।
शिक्षकों पर गंभीर आरोप और प्रशासन की कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए तीन शिक्षकों को निलंबित कर दिया। इनमें प्रभारी प्रधानाध्यापक और दो सहायक शिक्षक शामिल हैं। आरोप है कि इन शिक्षकों ने स्कूल के माहौल को प्रभावित किया और बच्चों को धार्मिक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया। साथ ही जिला प्रशासन के निर्देश पर नखासा थाने में इन शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम भी गठित की गई है, जो पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच कर रही है।
अधिकारियों की रिपोर्ट और प्रशासन की सख्ती
खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ शिक्षकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में नियमों के पालन को लेकर लापरवाही भी सामने आई है। जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि स्कूलों में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियों या भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान देना है, न कि किसी विशेष विचारधारा की ओर प्रेरित करना।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया और चिंता
इस मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। कुछ माता-पिता का कहना है कि उन्हें इस तरह की गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी। उनका कहना है कि वे बच्चों को स्कूल भेजते हैं ताकि वे पढ़ाई करें, न कि किसी विवाद का हिस्सा बनें। कुछ अभिभावकों ने कहा कि अगर ऐसी कोई गतिविधि पहले से चल रही थी, तो स्कूल प्रशासन को तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। वीडियो देखने के बाद वे भी हैरान और परेशान हैं।
शिक्षकों का पक्ष और सफाई
निलंबित किए गए प्रधानाध्यापक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से मेडिकल लीव पर हैं और उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी मीडिया से मिली। उन्होंने कहा कि स्कूल में किसी भी तरह की जबरदस्ती या धार्मिक गतिविधि नहीं कराई गई। उनका यह भी कहना है कि बच्चों ने अपनी मर्जी से कुछ चीजें अपनाई होंगी, लेकिन शिक्षकों की ओर से कोई दबाव नहीं बनाया गया। उन्होंने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया है।
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छात्रों के बयान में अलग अलग बातें
स्कूल के कुछ छात्रों ने बताया कि वे कभी-कभी खुद ही टोपी पहन लेते थे, जबकि कुछ छात्राओं ने कहा कि वे अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दुपट्टा या हिजाब लेकर आती थीं। कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि स्कूल में प्रार्थना और राष्ट्रगान नियमित रूप से होता है और पढ़ाई सामान्य तरीके से चलती है। उन्होंने कहा कि यह मामला पुरानी गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है।











