हम नहीं सुधरेंगे!मिरर वॉल के सामने भी नहीं बदली आदत, खुले में पेशाब कर रहे लोग!

मैसूर। सार्वजनिक जगहों पर खुले में पेशाब जैसी समस्या लंबे समय से भारत के कई शहरों में चर्चा का विषय रही है। इसी समस्या को रोकने के लिए कर्नाटक के मैसूर में नगर प्रशासन ने एक अनोखी और सोच से अलग पहल की ‘मिरर वॉल’ यानी शीशे वाली दीवार। इस पहल का उद्देश्य सीधा था लोग जब खुद को देखेंगे, तो शर्म और जागरूकता के कारण शायद गलत हरकत से बचेंगे।
मिरर वॉल क्या है और क्यों लगाई गई?
मैसूर के सबअर्बन बस स्टैंड के आसपास खुले में पेशाब की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इसे रोकने के लिए नगर निगम ने दीवारों पर बड़े शीशे (mirrors) लगा दिए। इस आइडिया के पीछे सोच थी कि लोग जब खुद को देखेंगे तो रुक जाएंगे, सार्वजनिक शर्म (social awareness) बढ़ेगी, खुले में गंदगी करने की आदत टूटेगी और शहर साफ और व्यवस्थित रहेगा नगर प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट पर अच्छा खासा खर्च भी किया, क्योंकि उम्मीद थी कि यह प्रयोग लोगों की सोच बदल देगा।
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क्या है ये वायरल वीडियो?
लेकिन कहानी ने एक अलग मोड़ ले लिया। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें साफ देखा गया कि एक व्यक्ति उसी मिरर वॉल के सामने खड़ा होकर खुले में पेशाब कर रहा है। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला था, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर गया क्या लोगों की आदतें इतनी गहरी हैं कि कोई असर नहीं पड़ता? क्या सिर्फ डिजाइन या टेक्नोलॉजी से समस्या हल हो सकती है? वीडियो के वायरल होते ही लोग दो हिस्सों में बंट गए कुछ ने नाराजगी जताई, तो कुछ ने तो पूरे सिस्टम पर ही सवाल उठा दिए।
सिविक सेंस पर बड़ा सवाल
इस घटना ने सबसे बड़ा मुद्दा उठाया सिविक सेंस यानी नागरिक जिम्मेदारी। कई लोगों ने कहा कि समस्या दीवार या व्यवस्था की नहीं है, बल्कि सोच की है। आज के समय में जब शहर डिजिटल और आधुनिक हो रहे हैं, तब भी कुछ पुरानी आदतें बदल नहीं पा रही हैं।
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सार्वजनिक जगहों की जिम्मेदारी किसकी?
यह सवाल अब फिर से चर्चा में है। क्या जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की है? या फिर हर नागरिक की भी उतनी ही है? सच्चाई यह है कि सरकार सुविधाएं देती है लेकिन उनका सही उपयोग जनता को करना होता है। शहर तभी साफ रहेगा जब लोग खुद जिम्मेदारी समझेंगे।
सोशल मीडिया पर जमकर बहस
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर बहस हुई। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि कुछ ने इसे जागरूकता की कमी बताया।











